नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी टकराव अब राजनीतिक बयानबाजी के नए दौर में पहुंच गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार, गृह मंत्री अमित शाह और संसद की कार्यवाही को लेकर लगाए गए आरोपों के कुछ ही देर बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी मोर्चा संभाल लिया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी के लगभग हर आरोप का विस्तार से जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार यह नैरेटिव बनाने का प्रयास करते हैं कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जाता, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही के दौरान उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला, लेकिन उन्होंने संसदीय नियमों का पालन करने के बजाय ऐसे शब्दों और आरोपों का सहारा लिया, जिन पर पीठासीन अधिकारी और सरकार की ओर से आपत्ति जताई गई।
'राहुल गांधी को बोलने से नहीं रोका गया'
भाजपा सांसद ने कहा कि राहुल गांधी का यह कहना कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं मिला, पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में दर्जनों सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी सदन में बोलने में सफल रहीं। ऐसे में केवल राहुल गांधी को रोके जाने का दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता। पात्रा ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केवल उस कथित असंसदीय शब्द पर आपत्ति जताई थी, जिसका इस्तेमाल राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान किया। संसद की नियमावली के अनुसार ऐसे शब्दों की अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वयं अपनी सीट से खड़े हुए और सदन के सदस्यों से राहुल गांधी की बात ध्यान से सुनने का आग्रह किया था। इससे स्पष्ट है कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के पक्ष में थी।'भाजपा से नहीं, अदालत में माफी मांगते हैं राहुल गांधी'
प्रेस कांफ्रेस के दौरान पात्रा ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी संबित पात्रा ने निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से कभी माफी नहीं मांगेंगे। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी का यह दावा उनके पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में राहुल गांधी ने कई मामलों में अदालत का रुख अपनाते हुए लिखित रूप से खेद या माफी व्यक्त की है। पात्रा ने शिवराज सिंह चौहान से जुड़े मानहानि मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने अदालत में लिखित माफीनामा दिया था। उन्होंने 'चौकीदार चोर है' टिप्पणी से जुड़े मामले का भी जिक्र किया और कहा कि उस मामले में राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपने बयान पर खेद व्यक्त किया था। संबित पात्रा ने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर आक्रामक बयान देना और अदालत में अलग रुख अपनाना कांग्रेस नेता की पुरानी राजनीतिक शैली बन चुकी है।
छात्रों पर गोली चलने के आरोप को बताया निराधार
भाजपा ने राहुल गांधी के उस आरोप को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने छात्रों पर गोली चलने और इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया था। संबित पात्रा ने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में गोली चली थी तो उसका कोई कारतूस, बैलिस्टिक रिपोर्ट या अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य अब तक क्यों सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में बल प्रयोग से जुड़े फैसले मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी लेते हैं और हर कार्रवाई को सीधे केंद्रीय गृह मंत्री से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
अमित शाह पर लगाए आरोपों को बताया 'बेबुनियाद'
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि उन्होंने स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अधिकारियों से फोन पर बातचीत करते देखा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संबित पात्रा ने कहा कि इतने गंभीर आरोप लगाने से पहले कोई ठोस प्रमाण होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले भी कई राष्ट्रीय मुद्दों पर इसी तरह के दावे करते रहे हैं। राफेल लड़ाकू विमान सौदे का जिक्र करते हुए पात्रा ने कहा कि उस समय भी राहुल गांधी ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लेकर कई आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में वे दावे टिक नहीं पाए। भाजपा का कहना है कि बिना साक्ष्य आरोप लगाना विपक्ष के नेता की राजनीतिक कार्यशैली का हिस्सा बन गया है।
छात्र आंदोलन पर राजनीति करने का आरोप
भाजपा ने राहुल गांधी पर छात्र आंदोलन का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। संबित पात्रा ने कहा कि संबंधित विवाद का समाधान सरकार और विभिन्न पक्षों के बीच बातचीत के जरिए निकाला गया, लेकिन कांग्रेस अब उसे अपनी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टास्क फोर्स गठित की गई, जिसमें शिक्षा, तकनीक, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। इसके अलावा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के लिए नया कानून भी लागू किया गया है।
भाजपा ने सार्वजनिक माफी की मांग दोहराई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष के नेता के पद पर बैठे व्यक्ति से तथ्यों पर आधारित बयान की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि धूमिल करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने इस दौरान राहुल गांधी से संसद और देश के सामने लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग दोहराई। साथ ही कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें तथ्यों और संसदीय मर्यादा के दायरे में रहकर ही व्यक्त किया जाना चाहिए।
