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कौन हैं दिनेश शर्मा? जिन्हें भाजपा ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए बनाया प्रत्याशी

Rajya Sabha by-election: भाजपा ने आगामी राज्यसभा उपचुनाव के लिए उत्तर प्रदेश से पार्टी के उम्मीदवार के रूप में डॉ. दिनेश शर्मा के नाम की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और लखनऊ के मेयर भी रह चुके दिनेश शर्मा को जमीनी स्तर की राजनीति के लिए जाना जाता है। इस सीट पर 15 सितंबर को वोट डाले जाएंगे।

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BJP ने दिनेश शर्मा को बनाया राज्यसभा उपचुनाव का प्रत्याशी।

Photo : PTI

Dinesh Sharma News: राज्यसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश यूपी से पूर्व उपमुख्यमंत्री और लखनऊ के पूर्व मेयर दिनेश शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर आगामी 15 सितंबर को उपचुनाव होना है और उसी दिन वोटों की गिनती भी की जाएगी। भाजपा सांसद हरद्वार दुबे के निधन के बाद ये सीट खाली हुई थी।

हरद्वार दुबे के निधन के बाद खाली हुई थी सीट

भाजपा ने साल 2020 में 8 नेताओं को राज्यसभा भेजा था, इनमें हरद्वार दुबे का नाम भी शामिल था। उच्च सदन में भाजपा के सांसद 74 वर्षीय हरद्वार दुबे का बीते 26 जून को राजधानी दिल्ली में निधन हो गया था। आगरा के रहने वाले दुबे की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, हालांकि उन्होंने दम तोड़ दिया।

यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को जानिए

दिनेश शर्मा भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने 18 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वे दो बार यूपी की राजधानी लखनऊ के मेयर भी रह चुके हैं। शर्मा का जन्म 12 जनवरी 1964 को लखनऊ में हुआ था। छात्र जीवन में भी वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए थे और छात्र संघ का चुनाव भी जीते। उन्होंने हावर्ड विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई की। इसके अलावा उन्होंने एमकॉम, मनोविज्ञान और मानव विकास में पीएचडी भी की है। मेयर बनने से पहले दिनश शर्मा लखनऊ यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर कार्यरत थे।

अटल बिहारी वाजपेयी और दिनेश शर्मा

साल 2006 की बात है जब अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना आखिरी भाषण दिया और वो दिनेश शर्मा के लिए... इसके बाद साल 2008 में पहली बार दिनेश शर्मा लखनऊ के मेयर चुने गए। साल 2012 में शर्मा दोबारा लखनऊ के मेयर बने। उत्तर प्रदेश चुनाव 2017 के बाद दिनेश शर्मा का नाम एक बार फिर सुर्खियों में आया और उन्हें प्रदेश का डिप्टी सीएम बनाया गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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