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बिहार से बंगाल तक हिंसाः सासाराम में बमबाजी तो बिहारशरीफ में किशोर की मौत, हावड़ा में बीजेपी MLA जख्मी; बोले सिब्बल- PM क्यों हैं चुप?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 3, 2023, 11:29 AM IST

पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार तक हिंसा का दौर जारी है। सोमवार सुबह सासाराम में फिर से बमबाजी की सूचना है। इससे एक दिन पहले बिहार के डीजीपी ने हिंसा ग्रस्त इलाकों का निरीक्षण किया और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।

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पश्चिम बंगाल और बिहार में भड़की हिंसा

Photo : PTI

Violence in Bihar and West Bengal: पश्चिम बंगाल से बिहार तक रामनवमी दिन शुरू हुई हिंसा की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। रह-रहकर दोनों ही राज्यों में बवाल जारी है। सोमवार सुबह बिहार के सासाराम में फिर से बमबामी हुई है, जिससे एक बार फिर से दहशत का माहौल बन गया है। इससे पहले शेरगंज इलाके में धार्मिक स्थल के बाहर भी धमाका हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। वहींं बिहारशरीफ में हुई गोलीबारी में एक 16 वर्षीय युवक की रविवार को मौत हो गई।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के हुगली में रविवार को भड़की हिंसा में भाजपा विधायक के घायल होने की सूचना है। जानकारी के मुताबिक, हुगली में रविवार को निकाली जा रही शोभायात्रा के दौरान भी हिंसा हुई। इस दौरान पत्थरबाजी और आगजनी की गई। बाद में पुलिस ने मोर्चा संभाला। इस हिंसा में भाजपा के विधायक बिमन घोष घायल हुए हैं। हिंसक झड़प के चलते इस इलाके में धारा 144 लागू की गई है।

युवक के सिर में लगी थी गोली

एक दिन पहले बिहारशरीफ के पहरौरा में दो गुटों में हुई हिंसक झड़प के दौरान गोलीबारी हुई। इसमें एक 16 साल के युवक के सिर में गोली लगी, जिसके बाद उसे पटना मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की पहचान स्थानीय दिहाड़ी मजदूर के बेटे गुलशन कुमार के रूप में की गई। बताया जा रहा है कि युवक घर से सब्जी लेने के लिए निकला था, इसी दौरान हिंसा में उसे गोली लग गई।

चुप क्यों हैं मोदी- कपिल सिब्बल

पश्चिम बंगाल और बिहार में सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने रविवार को इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाया और कहा कि हिंसा के लिए 2024 के आम चुनाव को कारण नहीं बनने दें। सिब्बल ने देश के लोगों से बंगाल और बिहार को जलाने, तथा नफरत के बीज बोने पर रोक लगाने की अपील करते हुए कहा कि इससे केवल नेताओं और राजनीतिक विचारधाराओं को लाभ हो सकता है। उन्होंने एक बयान में कहा कि इस नफरत का शिकार हमेशा आम आदमी होता है। सिब्बल ने सवाल किया, मैं चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह बोलें और हिंसा की निंदा करें। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस हिंसा के बीच दोनों में से कोई कुछ नहीं बोला, वे चुप क्यों हैं?

शाह ने राज्यपाल से की बात

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर रविवार को चिंता व्यक्त की और स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से बात की। सूत्रों ने यह जानकारी दी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिंसा से पैदा हुई स्थिति से निपटने में राज्य प्रशासन की मदद करने के लिए बिहार में अतिरिक्त अर्द्धसैन्य बलों को भेजने का फैसला किया है। बिहार सरकार के अनुरोध के बाद अतिरिक्त बलों को भेजा जाएगा। सूत्रों ने कहा, गृह मंत्री ने बिहार के राज्यपाल से बात की और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने राज्य में हिंसा पर चिंता भी व्यक्त की। ऐसी जानकारी है कि राज्यपाल ने शाह को राज्य में मौजूदा हालात की जानकारी दी।

गौरतलब है कि रामनवमी पर निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान बिहार के सासाराम और बिहार शरीफ में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। पुलिस ने सासाराम और बिहार शरीफ में सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में शनिवार तक 45 लोगों को गिरफ्तार किया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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