अल फलाह यूनिवर्सिटी में रची गई हमले की साजिश। तस्वीर-PTI
Delhi Blast Case Update: दिल्ली ब्लास्ट मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक देश में हमला करने की पूरी साजिश फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी में ही रची गई। यहां के आतंकी डॉक्टर यूनिवर्सिटी के लैब से ही ब्लास्ट में इस्तेमाल होने वाले केमिकल चुराते थे और यह चोरी इस तरह से अंजाम दी जाती थी कि किसी को इस चोरी पर शक न हो। दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आतंकी डॉक्टरों ने अमोनियम नाइट्रेट के अलावा लैब से अन्य केमिकल और केमिकल की जांच करने वाले किट भी चुराए। केमिकल की चोरी कम मात्रा में की जाती थी ताकि किसी को इसका शक न हो। यही नहीं चुराए गए केमिकल की एंट्री लैब के रजिस्टर में नहीं की जाती थी। बताया जाता है कि ये आतंकी डॉक्टर प्रोजेक्ट के नाम पर लैब से केमिकल निकालते थे। डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन कम मात्रा में केमिकल लैब से ले जाते थे ताकि किसी को शक न हो।
इस बीच जांच एजेंसियों ने फरीदाबाद के धौज गांव में अपनी जांच तेज कर दी है। यहां तलाशी ली जा रही है। पुलिस की कई टीमें दुकानों पर छापेमारी और दुकानदारों से पूछताछ कर रही हैं।
जांच एजेंसियों की पूछताछ में आतंकी मुजम्मिल ने कबूला है कि उसने साल 2023 में दिल्ली और कई अन्य शहरों में ब्लास्ट की साजिश रची थी। वह बीते दो साल से ब्लास्ट के लिए विस्फोटक, रिमोट और अन्य डिवाइस जुटा रहा था। यही नहीं विस्फोट में इस्तेमाल होने वाले अमोनियम नाइट्रेट और यूरिया खरीदने की जिम्मेदारी उसी के पास थी। सूत्रों के मुताबिक मुजम्मिल ने गुरुग्राम और नूंह से 26 क्विंटल एनपीके खाद खरीदा था। इस खाद को विस्फोटक में तब्दील करने की जिम्मेदारी डॉक्टर उमर मोहम्मद की थी। उमर मोहम्मद को ही विस्फोट के लिए केमिकल, रिमोट और डिवाइस एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई थी। मुजम्मिल ने बताया है कि उसने तीन लाख रुपये में NPK खाद खरीदी थी। ब्लास्ट कराने के लिए फंडिंग की गई थी। इसके लिए डॉ. मुज़म्मिल ने दिए 5 लाख रुपये दिए थे। डॉ. आदिल अहमद राथर को 8 लाख रुपये और डॉ. मुजफ्फर अहमद राथर को 6 लाख रुपये मिले थे।
मुजम्मिल ने बताया कि ब्लास्ट के लिए डॉ. उमर को 2 लाख और डॉ. शाहीना शाहिद को 5 लाख रुपये दिए गए। कुल 26 लाख रुपये कैश में जमा कर डॉ. उमर को दिए गए। इससे पहले भी मुजम्मिल दिल्ली पुलिस को पूछताछ में अहम लीड दे चुका है। उसने बताया कि हुंडई आई-20 कार को चला रहे आतंकवादी उमर उन नबी को कथित तौर पर हवाला के जरिए पैसे मिले थे।
समाचार एजेंसी आईएएनएस ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी साझा की है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मुजम्मिल ने पूछताछ के दौरान अधिकारियों को बताया कि डॉक्टरों को 20 लाख रुपए मिले थे। संभावनाएं हैं कि जैश-ए-मोहम्मद से यह पैसे आए थे और एक हैंडलर ने हवाला के जरिए डॉक्टरों तक यह रकम पहुंचाई थी। 20 लाख रुपए में से करीब तीन लाख रुपए उर्वरक खरीदने में खर्च किए गए। बता दें कि फरीदाबाद में आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट जब्त किया था, जिसका इस्तेमाल उर्वरक के साथ-साथ विस्फोटकों में कच्चे माल के रूप में भी किया जाता है।
सुरक्षा एजेंसियां आतंकी उमर उन नबी, मुजम्मिल और आतंकी मॉड्यूल मामले में आरोपी एक अन्य महिला डॉक्टर शाहीन के वित्तीय संबंधों की जांच कर रही हैं।
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