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Baba Siddiqui Murder Case: बाबा सिद्धीकी हत्याकांड का तीसरा आरोपी कोर्ट में पेश, 21 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया

Baba Siddiqui Murder Case: एनसीपी नेता बाबा सिद्धीकी की शनिवार रात मुंबई के बांद्रा इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में तीसरे आरोपी प्रवीण लोणकर को पुणे से गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने सोमवार को उसे 21 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

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बाबा सिद्धीकी हत्याकांड का तीसरा आरोपी अदालत में किया गया पेश।

Photo : ANI

Baba Siddiqui Murder Case: अजीत पवार गुट वाली एनसीपी के दिग्गज नेता बाबा सिद्धीकी हत्याकांड का तीसरा आरोपी प्रवीण लोणकर को आज (सोमवार) कोर्ट में पेश किया गया। मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट ने उसे 21 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मुंबई पुलिस ने प्रवीण लोणकर को पुणे से गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उसने अपने भाई शुभम लोणकर के साथ मिलकर तीन कथित शूटर में से दो को यह काम सौंपा था।

अब तक इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुंबई पुलिस क्राइस ब्रांच के अनुसार, प्रवीण और शुभम ने दो कथित शूटर को बाबा सिद्धीकी की हत्या का काम सौंपा था, जिनमें से एक उत्तर प्रदेश का निवासी है और दूसरे का नाम शिवकुमार गौतम है। गौतम फरार है, जबकि पुलिस ने उत्तर प्रदेश के निवासी और एक अन्य कथित शूटर को गिरफ्तार कर लिया है, जिसकी पहचान गुरमेल बलजीत सिंह (23) के रूप में हुई है।

महाराष्ट्र के बाहर भी तलाश जा रहा हत्याकांड का नेटवर्क

महाराष्ट्र पुलिस ने इस हत्याकांड की जांच के लिए 15 सदस्यीय पुलिस टीम गठित की है। अधिकारियों ने बताया कि यह टीम महाराष्ट्र से बाहर गई हैं और यह पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि शूटरों को किसने साजोसामान की सहायता प्रदान की। बता दें, बाबा सिद्दीकी (66) को शनिवार रात मुंबई के बांद्रा इलाके के खेर नगर में उनके विधायक बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर तीन लोगों ने गोली मार दी, जिसके बाद उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली हत्या की जिम्मेदारी

मुंबई पुलिस उस सोशल मीडिया पोस्ट का सत्यापन कर रही है जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के एक कथित सदस्य ने सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेदारी ली है। अधिकारियों के अनुसार, अपराध शाखा विभिन्न पहलुओं से भी जांच कर रही है, जिसमें सुपारी देकर हत्या कराए जाने, व्यवसाय या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या झुग्गी पुनर्वास परियोजना को लेकर धमकी के संभावित पहलू शामिल है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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