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'बाबा सिद्दीकी कोई भला आदमी थोड़े ही था, उसके तो दाऊद से भी संबंध थे; बोला लॉरेंस बिश्नोई गैंग का 'शूटर'

Baba Siddique Murder: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गिरफ्तार शूटर योगेश उर्फ राजू ने दावा किया है कि बाबा सिद्धीकी को इसलिए मारा गया क्योंकि वह सलमान खान मामले के बीच में आ रहा था। उसने कहा कि बाबा सिद्दीकी कोई भला आदमी थोड़े ही थे, उनके तो भारत के अतिवांछित अपराधी दाऊद इब्राहिम तक से संबंध हैं।

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बाबा सिद्धीकी।

Photo : Twitter

Baba Siddique Murder: मथुरा में पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार हुए लॉरेंस बिश्नोई-हाशिम बाबा गिरोह के शूटर योगेश उर्फ राजू ने बाबा सिद्धीकी को लेकर बड़ा दावा किया है। उसने कहा है कि मुंबई में मारे गये महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी कोई भला आदमी थोड़े ही थे, उनके तो भारत के अतिवांछित अपराधी दाऊद इब्राहिम तक से संबंध हैं।

पुलिस के अनुसार मौजूदा समय में योगेश उर्फ राजू लॉरेंस बिश्नोई गिरोह में शामिल होकर कई वारदातों को अंजाम देता रहा है और दिल्ली में पिछले माह हुए सनसनीखेज नादिरशाह हत्याकांड का मुख्य शूटर भी है। हालांकि उसका मुंबई में 12 अक्टूबर को हुई राजनेता की हत्या से कोई संबंध नहीं है।

मुठभेड़ में हुआ गिरफ्तार

पुलिस अधीक्षक (नगर) अरविंद कुमार ने बताया कि दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा की सूचना के आधार पर रिफाइनरी थाना पुलिस ने संयुक्त अभियान के तहत बदायूं के योगेश कुमार उर्फ राजू (26) को गुरुवार तड़के रेलवे स्टेशन को जाने वाले रास्ते पर मुठभेड़ के बाद पकड़ा था। मुठभेड़ में राजू को पैर में गोली लगने के बाद इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसने पत्रकारों से कहा, फिल्म अभिनेता सलमान खान के मामले में लारेंस बिश्नोई गिरोह के बीच आ रहा नेता बाबा सिद्दीकी इसलिए मारा गया। वह कोई भला आदमी नहीं था, उस पर तो खुद वहां मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून) में मामला दर्ज था।

नादिरशाह की हत्या में हाथ नहीं होने का दावा

राजू ने कहा, आम आदमी पर तो मकोका मामला दर्ज होगा नहीं, बल्कि उसके बारे में तो यह कहा जाता है कि वह दाऊद (1993 के मुंबई नरसंहार सीरीज बम ब्लास्ट) का आदमी था। उसने कहा, जब कुछ लोग ऐसे किसी के बीच में आएंगे, तो कुछ न कुछ तो होगा ही। दिल्‍ली में नादिरशाह की हत्या के बारे में राजू ने बताया, उस मामले में उसका तो किसी से कोई सम्पर्क था ही नहीं, दिल्ली वाले दोस्तों के जरिए ही बात हुई थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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