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ASEAN: 'सैन्य ताकत नहीं, साझेदारी ही असली सुरक्षा कवच', रक्षा मंत्रियों की बैठक पड़ोसी देशों को राजनाथ सिंह का संदेश

ASEAN: 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम-प्लस) में हिस्सा लेते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा का भविष्य न केवल सैन्य क्षमताओं पर निर्भर करेगा, बल्कि राष्ट्रों की साझा संसाधनों के प्रबंधन, डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढांचे की रक्षा करने और मानवीय संकटों का सामूहिक रूप से सामना करने की क्षमता पर भी निर्भर करेगा।

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ASEAN: रक्षा मंत्रियों की बैठक में राजनाथ सिंह ने लिया हिस्सा।(फोटो सोर्स: ANI)

ASEAN Defence Ministers' Meeting Plus: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मलेशिया में आयोजित 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम-प्लस) में हिस्सा लिया। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित इस बैठक का विषय एडीएमएम-प्लस के 15 वर्षों पर चिंतन और आगे का रास्ता तैयार करना था।

आयोजन में हिस्सा लेते हुए राजनाथ सिंह ने कहा," क्षेत्रीय सुरक्षा का भविष्य न केवल सैन्य क्षमताओं पर निर्भर करेगा, बल्कि राष्ट्रों की साझा संसाधनों के प्रबंधन, डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढांचे की रक्षा करने और मानवीय संकटों का सामूहिक रूप से सामना करने की क्षमता पर भी निर्भर करेगा। एडीएमएम-प्लस एक ऐसे सेतु का काम कर सकता है जो रणनीतिक संवाद को व्यावहारिक परिणामों से जोड़ता है, जिससे क्षेत्र में शांति बनाए रखने और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।"

21वीं सदी भारत और आसियान की सदी है: पीएम मोदी

इससे पहले आसियान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि 21वीं सदी भारत और आसियान की सदी है। मलेशिया में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारत और आसियान मिलकर दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और आसियान न केवल भौगोलिक रूप से जुड़े हैं, बल्कि मबजूत ऐतिहासिक संबंधों और साझा मूल्यों के सूत्र में भी बंधे हैं।

पीएम मोदी ने कहा था कि अनिश्चितताओं के इस दौर में भी, भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी में लगातार प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि यह मज़बूत साझेदारी वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए एक मज़बूत आधार के रूप में उभरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हर आपदा में अपने आसियान मित्रों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि समुद्री आपदा प्रबंधन, सुरक्षा और नीली अर्थव्यवस्था में सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने 2026 को “आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष” भी घोषित किया।

आसियान में कितने देश हैं शामिल

एडीएमए दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ के अंदर सर्वोच्च रक्षा परामर्शदात्री और सहयोगात्मक तत्र के रूप में काम करता है. इसमें आसियान देश शामिल हैं, जैसे- कंबोडिया, ब्रुनेई, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, तिमोर-लेस्ते, म्यांमार, वियतनाम, लाओ पीडीआर, थाईलैंड और फिलीपींस शामिल हैं. इसमें आठ संवाद साझेदार भी शामिल हैं, जैसे- भारत, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका।

कब हुई थी पहली ADMM-प्लस बैठक?

साल 1992 में भारत आसियान का एक संवाद भागीदार बना है। पहली ADMM-प्लस बैठक अक्टूबर 2010 में वियतनाम के हनोई में आयोजित हुई थी। ADMM-प्लस का आयोजन 2017 से आसियान और उसके सहयोगी देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष किया जाने लगा है। वर्तमान में भारत 2024-2027 तक के लिए मलेशिया के साथ आतंकवाद-निरोध पर एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप का सह अध्यक्ष है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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