Asaram Case: राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद आसाराम बापू (Asaram Bapu) ने जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया। बताया जा रहा है कि वह अस्पताल से सीधे जेल पहुंचे। हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत के आदेश के बाद उन्हें आत्मसमर्पण करना पड़ा। राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) की जोधपुर पीठ में इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने की।
अदालत ने आसाराम और अन्य आरोपियों की अपीलों पर फैसला सुनाते हुए कुछ धाराओं में राहत दी, लेकिन मुख्य मामले में सजा कायम रखी। अदालत ने गैंगरेप और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं से आसाराम को बरी कर दिया, लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उनकी उम्रकैद की सजा को सही माना। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) के तहत दी गई सजा को बरकरार रखा। इसके अलावा गलत तरीके से बंधक बनाना, मानव तस्करी, धमकी देना, महिला की मर्यादा भंग करना और यौन उत्पीड़न जैसी कई धाराओं में भी दोषसिद्धि कायम रखी गई।
अदालत ने सभी आरोपों से किया बरी
पॉक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं के तहत भी अदालत ने सजा को बरकरार रखा है। हालांकि इस मामले में सह-आरोपी संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी और शरत चंद्र को राहत मिली है। अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। इससे पहले निचली अदालत ने उन्हें भी दोषी ठहराया था। हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
2018 में आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी
फैसले के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि उसके पास आरोपी के लिए 'अच्छी और बुरी दोनों खबरें' हैं। बाद में कोर्ट ने अपना विस्तृत आदेश सुनाया। गौरतलब है कि आसाराम को साल 2018 में अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद निचली अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फिलहाल वह अस्थायी जमानत पर बाहर थे, लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ा है।
