Asaduddin Owaisi On ASI report Gyanvapi: ज्ञानवापी मस्जिद पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सबसे अधिक नाराजगी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने जाहिर की है। ओवैसी इस रिपोर्ट पर भड़क गए हैं। उन्होंने एएसआई को हिंदुत्व का गुलाम तक बता डाला है। X पर अपने पोस्ट में ओवैसी ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी भी पेशेवर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकार के सामने टिकेगी नहीं। यह रिपोर्ट अनुमानों पर आधारित है और विज्ञान सम्मत शोध का मजाक है। जैसा कि एक बड़े विद्वान ने एक बार कहा था है कि 'ASI हिंदुत्व की गुलाम है।'
पक्षकारों को दी गई एएसआई की रिपोर्ट
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बृहस्पतिवार को कहा कि एएसआई की रिपोर्ट से संकेत मिला है कि ज्ञानवापी मस्जिद वहां पहले से मौजूद एक पुराने मंदिर के अवशेषों पर बनाई गई थी। जैन ने संवाददाताओं को बताया कि एएसआई की 839 पन्नों वाली सर्वेक्षण रिपोर्ट की प्रतियां बृहस्पतिवार देर शाम अदालत द्वारा संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गईं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित मस्जिद 17वीं शताब्दी में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान एक भव्य हिंदू मंदिर को ध्वस्त किए जाने के बाद उसके अवशेषों पर बनाई गई थी।
तहखानों में हिंदू देवताओं की मूर्तियों के अवशेष-जैन
जैन ने यह भी दावा किया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट में मंदिर के अस्तित्व के पर्याप्त सबूत मिलने की बात कही गई है, जिस पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। उन्होंने दावा किया कि सर्वेक्षण के दौरान दो तहखानों में हिंदू देवताओं की मूर्तियों के अवशेष पाए गए हैं। जैन ने दावा किया कि ज्ञानवापी मस्जिद के निर्माण में स्तंभों सहित पहले से मौजूद मंदिर के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने दावा किया कि मंदिर को तोड़ने का आदेश और तारीख पत्थर पर फारसी भाषा में अंकित है। उन्होंने कहा कि ‘महामुक्ति’ लिखा हुआ एक पत्थर भी मिला है।
'मस्जिद के पीछे की पश्चिमी दीवार एक मंदिर की दीवार'
जैन ने कहा कि मस्जिद के पीछे की पश्चिमी दीवार एक मंदिर की दीवार है। उन्होंने कहा कि उस दीवार पर घण्टा, वल्लरी (लताओं का उकेरा गया चित्र) और स्वास्तिक का चिह्न मिला है। दीवार पर पत्थरों पर उकेरा गया ब्रह्म कमल का तोरण द्वार बना हुआ है। जैन ने कहा कि सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्ञानवापी परिसर में स्थित तहखाने की छत जिन खम्भों पर टिकी है वे सब नागर शैली के मंदिर के स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि इन साक्ष्यों से यह प्रतीत होता है कि 17वीं शताब्दी में औरंगजेब द्वारा जब आदि विशेश्वर का मंदिर तोड़ा गया था तो उसके पूर्व उक्त स्थान पर विशाल मंदिर ही था। जैन ने कहा कि अब हम वजू खाने के सर्वेक्षण की मांग अदालत के समक्ष करेंगे।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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