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जूते की नोक पर इस्तीफा लेकर चलता हूं... शराब घोटाले में आरोपों के बीच पहली बार 'इस्तीफे' पर बोले केजरीवाल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 17, 2023, 06:42 PM IST

Arvind Kejriwal: केजरीवाल ने पहली बार इस्तीफे को लेकर सार्वजनिक रूप से बयान दिया। उन्होंने कहा, हमें सत्ता का लालच नहीं है। मैंने 49 दिन में इस्तीफा दे दिया था। मुझे मुख्यमंत्री की कुर्सी का लालच नहीं है। इस्तीफा मैं जूते की नोंक पर लेकर चलता हूं।

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अरविंद केजरीवाल

Photo : Twitter

Arvind Kejriwal: शराब घोटाले में घिरी आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के कई बड़े नेता इस समय जेल में हैं और अब ईडीपार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पूछताछ की तैयारी कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि प्रवर्तन निदेशालय केजरीवाल की गिरफ्तारी भी कर सकती है। ऐसे में चर्चा इस बात की है कि जेल जाने से पहले केजरीवाल इस्तीफा देंगे या नहीं?

इन अटकलों पर पहली बार अरविंद केजरीवाल का बयान सामने आया है। शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी से सत्ता छीनने के लिए फर्जी केस बनाकर उनके नेताओं को फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस जन्म में आम आदमी पार्टी को दिल्ली में नहीं हरा सकते हैं।

पद की लालसा नहीं, इस्तीफा जूते की नोंक पर

केजरीवाल ने इस दौरान पहली बार इस्तीफे को लेकर सार्वजनिक रूप से बयान दिया। उन्होंने कहा, हमें सत्ता का लालच नहीं है। मैंने 49 दिन में इस्तीफा दे दिया था। किसी ने मुझसे इस्तीफा मांगा नहीं था। उन्होंने कहा, मैं दुनिया का पहला सीएम होऊंगा, जिसने 49 दिन के अंदर अपनी मर्जी से इस्तीफा दे दिया था। केजरीवाल ने आगे कहा कि मुझे मुख्यमंत्री की कुर्सी का लालच नहीं है। इस्तीफा मैं जूते की नोंक पर लेकर चलता हूं। उन्होंने कहा, इस्तीफे पर दिल्ली की जनता से पूछकर फैसला करेंगे।

जेल से जीत लेंगे चुनाव

इस दौरान केजरीवाल ने भाजपा पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा, एक फर्जी शराब घोटाला बनाकर हमारे संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, विजय नायर और सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार कर लिया गया। अब मुझे गिरफ्तार करने की तैयारी है। उन्होंने मैं जेल जाने से नहीं डरता। मैं उनको कहना चाहता हूं कि केजरीवाल को भले ही जेल में डाल दो, आम आदमी पार्टी जेल से भी जीत जाएगी। केजरीवाल ने इस दौरान भगत सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर भगत सिंह जेल में रह सकते हैं, मनीष सिसोदिया जेल में रह सकते हैं, सत्येंद्र जैन जेल में रह सकते हैं तो मुझे जेल जाने में क्या दिक्कत। अंदर ठीक-ठाक इंतजाम होता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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