Malabar 2020: समुद्र में दिखी मिग-29के और अमेरिकी एफ-18 की 'युगलबंदी', टार्गेट को बनाया निशाना, Video

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Nov 20, 2020, 10:55 AM IST

MiG-29K & F-18s carrie out simulated attacks on surface force during Malabar 2020

Malabar 2020: समुद्र में दिखी मिग-29के और अमेरिकी एफ-18 की 'युगलबंदी', टार्गेट को बनाया निशाना, Video

नई दिल्ली : मालाबार सैन्य अभ्यास 2020 के दूसरे चरण में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान की नौसेनाएं अपनी ताकत एवं रणनीतिक कुशलता का प्रदर्शन कर रही हैं। अरब की खाड़ी में जारी इस सैन्य अभ्यास में चारों देशों के युद्धपोत, विध्वंसक, पनडुब्बियां और लड़ाकू विमानों ने आपसी तालमेल एवं समन्वय से समुद्र में दुश्मन को पस्त करने की अपनी रणनीति को जांचा-परखा है। दूसरे चरण के अभ्यास के अंतिम दिन इस सैन्यअभ्यास का एक वीडियो सामने आया है जिसमें नौसेना का लड़ाकू विमान मिग-29के और अमेरिकी नौसेना के एफ-18 को अभियान को अंजाम देते हुए देखा जा सकता है। अभियान के लिए युद्धपोत से उड़ान भरते समय का यह वीडियो काफी रोमांचकारी है। मिग-29के ने एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विक्रमादित्य से उड़ान भरी। 

बंगाल की खाड़ी में संपन्न हुआ पहला चरण
मालाबार 2020 एक्सरसाइज का पहला चरण नवंबर के पहले सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में संपन्न हुआ। दरअसल, दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत महासागर में चीन अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। क्वाड देश अपने इस सैन्य अभ्यास से चीन को संदेश देना चाहते हैं कि वे समुद्र नौवहन में किसी एक देश का प्रभुत्व स्वीकार नहीं करने वाले।

चीन के बढ़ते प्रभुत्व को जवाब
भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान हिंद प्रशांत महासागर एवं दक्षिण चीन सागर में नियम आधारित एक व्यवस्था चाहते हैं। यह नौसैनिक युद्धाभ्यास पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ भारत के जारी तनाव के बीच हुआ है, इसके भी कई रणनीतिक मायने हैं। भारत और अमेरिका के बीच नौसैनिक सैन्य अभ्यास साल 1992 में शुरू हुआ। पहली बार यह सैन्य अभ्यास केरल के मालाबार में हुआ इसलिए इसका नाम मालाबार अभ्यास पड़ा।

ऑस्ट्रेलिया भी इससे जुड़ा
साल 1998 में परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका ने इस अभ्यास में शामिल होने से इंकार कर दिया। बाद में वह एक बार फिर से इससे जुड़ गया। साल 2015 में जापान मालाबार युद्धाभ्यास का हिस्सा बना। साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया भी इससे जुड़ गया। पहली बार चार देशों की नौसेनाएं इस युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रही हैं। 

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