कश्मीर: अल्पसंख्यकों के लिए जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर, घाटी में हिंदुओं और सिखों पर बढ़े हमले

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Oct 11, 2021, 10:00 PM IST

Kashmir Minority distress Helpline: कश्मीर में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के चलते पुलिस ने अल्पसंख्यक संकट हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। मदद के लिए 01942440283 पर कॉल किया जा सकता है।

कश्मीर: अल्पसंख्यकों के लिए जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर, घाटी में हिंदुओं और सिखों पर बढ़े हमले
Photo Credit: AP

नई दिल्ली: हाल ही में कश्मीर में आतंकियों द्वारा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया है। इसी को देखते हुए अब कश्मीर में अल्पसंख्यकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने बताया कि कश्मीर पुलिस ने अल्पसंख्यक संकट हेल्पलाइन- 0194-2440283 स्थापित की है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में कोई भी 0194-2440283 पर सहायता के लिए कॉल कर सकता है।

हाल के दिनों में ऐसे मामले सामने आए जिसके आधार पर कहा गया कि कश्मीर घाटी में निशाना बनाकर अल्पसंख्यकों (हिंदुओं एवं सिखों) की हत्या की जा रही है। जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में कई लोगों की मौत हुई है। श्रीनगर में एक स्कूल के अंदर प्रधानाध्यापिका सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आतंकियों ने कश्मीरी पंडित कारोबारी माखनलाल बिंदरू की भी गोली मारकर हत्या कर दी। 



न्यूज एजेंसी 'भाषा' के अनुसार, अल्पसंख्यकों की लगातार लक्षित हत्याएं किए जाने से कश्मीर घाटी के दहल उठने के बीच कश्मीरी पंडितों के एक संगठन ने कहा कि सरकारी नौकरी कर रहे समुदाय के कुछ लोगों ने अपनी जान को खतरा होने को लेकर यहां से जम्मू जाना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासन एक सुरक्षित माहौल उपलब्ध करा पाने में अक्षम है।
इन लोगों को 2010-11 में एक पुनर्वास पैकेज के तहत सरकारी नौकरी दी गई थी। सूत्रों ने बताया कि इस बीच, प्रशासन ने अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों को 10 दिनों की छुट्टी दी है।


लक्षित हत्याओं के चलते कश्मीर पंडित समुदाय के सदस्यों को आतंकी समूहों द्वारा उन्हें भी निशाना बनाये जाने का डर सता रहा है। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) के अध्यक्ष संजय टिकू ने कहा कि करीब 500 या इससे अधिक लोगों ने बडगाम, अनंतनाग और पुलवामा जैसे इलाकों को छोड़ कर जाना शुरू कर दिया है। कुछ गैर कश्मीरी पंडित परिवार भी चले गये हैं। यह 1990 का दोहराव है। 

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