Cyclone Arnab Alert: बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में सक्रिय चक्रवात ‘अर्नब’ आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात के 28 अक्टूबर की सुबह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के करीब तट पार करने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है।
श्रीकाकुलम में बारिश, कई जिलों में तेज हवाओं का खतरा
चक्रवात के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे से 11 बजे के बीच श्रीकाकुलम जिले के पलासा और मंदासा में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। पलासा में ढाई घंटे के दौरान लगभग 25 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। तिरुपति और अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) जिलों में भी तेज हवाओं की खबर है। मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तैयारियों की समीक्षा की
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने उच्चस्तरीय बैठक में चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों को संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाली 4,711 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में सुरक्षित पहुंचाने की तैयारी की है। आपातकालीन राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य सरकार ने 20 जिलों को कुल 27 करोड़ रुपये की सहायता राशि भी जारी की है।
15 NDRF टीमें तैनात, 1,763 चक्रवात आश्रय केंद्र तैयार
चक्रवात से निपटने के लिए राज्य में 15 राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) टीमें तैनात की गई हैं। प्रशासन ने 1,763 चक्रवात आश्रय केंद्रों को भी तैयार रखा है। प्रभावित क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों और समुद्र तटों को एहतियातन बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें तथा अफवाहों पर भरोसा न करें। चक्रवात की दिशा और तीव्रता पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोगों की सुरक्षा और संभावित नुकसान को कम करने के लिए राहत एवं बचाव एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
