बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात अर्नब तेजी से ताकतवर हो रहा है। अक्टूबर महीने के अंतिम कुछ दिन हैं और एक बार फिर भारत के पूर्वी तट पर भीषण समुद्री तूफान का खतरा मंडरा रहा है। भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अर्नब कल यानी बुधवार 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इस दौरान 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंकों की रफ्तार 140 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। IMD के 27 अक्टूबर के तटीय बुलेटिन में इसे अत्यंत गंभीर नहीं, बल्कि बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) बताया गया।
भारत के पूर्वी तट पर आया अब तक का सबसे भीषण चक्रवात 29 अक्टूबर 1999 को आया था। ओडिशा सरकार के दस्तावेजों के मुताबिक उस समय हवा की रफ्तार 300 किमी प्रति घंटे से ज्यादा पहुंच गई थी। उस भीषण चक्रवात में लगभग 10 हजार लोगों की मौत हो गई थी। क्या आपने कभी सोचा है कि अक्टूबर और नवंबर में ही बंगाल की खाड़ी में सबसे ज्यादा खतरनाक चक्रवात क्यों बनते हैं? भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा तबाही किस तूफान ने मचाई थी और अर्नब की ताकत को किस श्रेणी में रखा गया है? आइए, इन प्रश्नों के उत्तर जानते हैं।
अक्टूबर-नवंबर में ही क्यों आते हैं भीषण चक्रवात?
बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने के दो प्रमुख मौसम होते हैं। पहला- मानसून से पहले यानी अप्रैल से जून और दूसरा- मानसून के बाद यानी अक्टूबर से दिसंबर। इनमें अक्टूबर और नवंबर खासतौर पर काफी अहम हैं। IMD के अनुसार, अक्टूबर में ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तट पर चक्रवातों के पहुंचने की संभावना ज्यादा रहती है, जबकि नवंबर में आंध्र प्रदेश का तट भी इसकी चपेट में आ सकता है।
अक्टूबर-नवंबर में भीषण चक्रवात आने के तीन प्रमुख कारण
- समुद्र का गर्म पानी : मानसून के बाद भी बंगाल की खाड़ी के पानी में पर्याप्त गर्मी बनी रहती है। गर्म समुद्र से वाष्पीकरण बढ़ता है और वातावरण में नमी पहुंचती है। यही नमी चक्रवात को ऊर्जा देने में अहम भूमिका निभाती है।
- हवाओं की अनुकूल स्थिति : चक्रवात को मजबूत होने के लिए वायुमंडल की अलग-अलग ऊंचाइयों पर चलने वाली हवाओं के बीच अंतर यानी वर्टिकल विंड शीयर का कम होना मददगार होता है। जबकि ज्यादा विंड शीयर तूफान की संरचना को कमजोर कर सकता है।
- मानसून की वापसी : मानसून के लौटने के दौरान वायुमंडल में नमी, निम्न दबाव और एयर सर्कुलेशन की अनुकूल स्थितियां बनती हैं। जब ये स्थितियां एक साथ आती हैं, तो समुद्र में बना कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे चक्रवात का रूप ले सकता है।
भारत का सबसे विनाशकारी चक्रवात कौन सा था?
भारत में आधुनिक मौसम रिकॉर्ड के सबसे विनाशकारी तूफानों में 29 अक्टूबर 1999 को ओडिशा से टकराया सुपर साइक्लोन प्रमुख है। IMD के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इस तूफान में 9885 लोगों की मौत हुई थी। इसकी अनुमानित अधिकतम हवा की रफ्तार 260 किमी प्रति घंटे तक पहुंची और समुद्र में ऊंची लहरों तथा भारी बारिश ने व्यापक तबाही मचाई। जबकि ओडिशी सरकार के दस्तावेजों के मुताबिक हवा की रफ्तार 300 किमी प्रति घंटे से ज्यादा पहुंच गई थी।
जब बात सबसे ज्यादा जनहानि के वैश्विक रिकॉर्ड की होती है तो 1970 के भोला चक्रवात का नाम सबसे ऊपर आता है। भोला चक्रवात ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश और आसपास के इलाकों में तबाही मचा दी थी। वर्ल्ड मीटिओरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) ने भोला चक्रवात के 50 साल पूरा होने के अवसर पर साल 2020 में एक लेख छापा था, जिसके अनुसार इस चक्रवात की जद में आए 5 लाख लोग असमय काल के गाल में समा गए थे। इसे इतिहास के सबसे घातक चक्रवातों में गिना जाता है। इसलिए भारत में नुकसान और दुनिया में जनहानि के आधार पर दोनों घटनाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है।
भारत के 10 प्रमुख विनाशकारी चक्रवात और उनकी कैटेगरी
यहां बताए जा रहे चक्रवाती तूफान भारत में बड़े प्रभाव और विनाश के लिए जाने जाते हैं। बता दें कि यह नुकसान के आधार पर कोई आधिकारिक रैंकिंग नहीं है।
| चक्रवात का नाम | साल | प्रमुख प्रभावित क्षेत्र | IMD श्रेणी |
| ओडिशा सुपर साइक्लोन | 1999 | ओडिशा | सुपर साइक्लोन |
| अम्फान | 2020 | पश्चिम बंगाल, ओडिशा | सुपर साइक्लोन |
| ताउते | 2021 | गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिमी तट | अत्यंत गंभीर |
| फैलिन | 2013 | ओडिशा, आंध्र प्रदेश | अत्यंत गंभीर |
| फानी | 2019 | ओडिशा | अत्यंत गंभीर |
| हुदहुद | 2014 | आंध्र प्रदेश | बहुत गंभीर |
| वरदा | 2016 | तमिलनाडु | बहुत गंभीर |
| बिपरजॉय | 2023 | गुजरात | अत्यंत गंभीर |
| ओखी | 2017 | तमिलनाडु, केरल, लक्षद्वीप | बहुत गंभीर |
| तितली | 2018 | ओडिशा, आंध्र प्रदेश | बहुत गंभीर |
इन तूफानों की श्रेणियां IMD के क्लासिफिकेशन के अनुरूप हैं। बता दें कि चक्रवात की श्रेणी उसकी हवा की अधिकतम निरंतर गति के आधार पर तय होती है, जबकि वास्तविक नुकसान तूफान के रास्ते, समुद्री लहरों, बारिश, बाढ़ और आबादी की संवेदनशीलता पर भी निर्भर करता है।
Arnab cyclone
चक्रवात अर्नब किस कैटेगरी का तूफान है?
IMD के 27 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार, अर्नब बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में एक्टिव था। मौसम विभाग ने इसके आंध्र प्रदेश और यानम तट के बीच, बापटला और विशाखापट्टनम के आसपास, 28 अक्टूबर की सुबह बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में पहुंचने का अनुमान जताया है। उस समय अनुमानित निरंतर हवा की रफ्तार 125 से 135 किमी प्रति घंटे और झोंकों की गति 150 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है।
IMD के क्लासिफिकेशन में 89 से 117 किमी प्रति घंटे की निरंतर हवा वाला तूफान 'गंभीर चक्रवाती तूफान', 118 से 166 किमी प्रति घंटे वाला 'बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान' और 167 से 221 किमी प्रति घंटे वाला 'अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान' कहलाता है। 222 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की निरंतर हवा वाला तूफान 'सुपर साइक्लोन' की श्रेणी में आता है।
साइक्लोन क्या होता है?
भारत ही नहीं, दुनियाभर के तटीक इलाकों में अक्सर चक्रवाती तूफान आते रहते हैं। चक्रवाती तूफानों को अलग-अलग जगह के हिसाब से अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है। साइक्लोन, हरिकेन और टाइफून, तीनों ही चक्रवाती तूफान होते हैं। उत्तर अटलांटिक महासागर और उत्तर-पूर्वी प्रशांत महासागर में आने वाले तूफानों को हरिकेन कहा जाता है। जबकि उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में उठने वाले तूफानों को टाइफून कहा जाता है। दक्षिण प्रसांत और हिंद महासागर में आने वाले तूफान साइक्लोन कहे जाते हैं।
साइक्लोन का नाम कैसे रखा जाता है?
चक्रवाती तूफानों या साइक्लोन को नाम देना अटलांटिक महासागर के आसपास के देशों ने साल 1953 में शुरू किया था। साल 2024 में यूएन एजेंसी वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने एक नाया सिस्टम बना दिया। अब जिस इलाके में चक्रवाती तूफान उठ रहा है, उसके आसपास के देश ही उसे नाम देते हैं। इस व्यवस्था के बाद भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव, ओमान और थाईलैंड को मिलाकर 8 देशों ने एक मीटिंग में हिस्सा लिया और हर देश ने चक्रवाती तूफान के लिए 8 नाम सुझाए। इस तरह से सभी 8 देशों ने मिलकर कुल 64 नामों की लिस्ट दी। जैसे निसर्ग तूफान का नाम बांग्लादेश ने दिया था, जबकि अम्फान का नाम थाईलैंड ने सुझाया था। इसी तरह अभी बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान अर्नब का नाम भी बांग्लादेश ने दिया है, जिसका मतलब समुद्र या महासागर होता है।
