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क्या दक्षिण की सियासत में चमकेगा ग्लैमर का एक और सितारा? विजय के बाद एक्टर धनुष के बारे में क्यों हो रही चर्चा

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि धनुष ने राजनीति में आने के बारे में अभी तक सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है। उन्होंने न तो अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत और न ही आरएसएस नेता के साथ अपनी मुलाकात के बारे में कोई टिप्पणी की है। जो कुछ है वह पर्दे के पीछे और दबी जुबान में है।

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तमिलनाडु की राजनीति में हो सकती है धनुष की एंट्री।
Written by: आलोक कुमार राव
Updated Oct 27, 2026, 14:53 IST
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Actor Dhanush : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक्टर विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की सफलता रुपहले पर्दे के दिग्गजों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। ग्लैमर की चकाचौंध में रहने वाले एक्टर सियासी मोर्चे पर अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं। तमिलनाडु के सियासी गलियारों में इन दिनों एक्टर धनुष के राजनीति में उतरने की चर्चा जोरों पर है। दरअसल, हाल के समय में धनुष की मुलाकात दक्षिण के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से हुई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अगस्त एवं सितंबर के महीने में धनुष की मुलाकात आरएसएस के इस पदाधिकारी से हुई। इस मुलाकात के बाद चर्चा है कि धनुष अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं।

धनुष की सोशल मीडिया की गतिविधियों एवं उनके सामाजिक दायरे के विस्तार ने उनके राजनीति में आने की अटकलें को हवा दी है। हाल के दिनों में धनुष के प्रशंसकों के नेटवर्क का विस्तार एक समाज सेवा अभियान में हुआ है। बीते 25 अक्टूबर को चेन्नई में महिला समर्थकों के सम्मेलन को इससे जोड़कर देखा जा रहा है। धनुष की योजना शिक्ष क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले प्रतिभाओं को अवॉर्ड देकर सम्मानित करने की भी है। खास बात यह है कि इस तरह के सामाजिक कार्यों ने एक्टर विजय की समाज में पहचान सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई। राज्य में अपनी लोकप्रियता में इजाफा होने के बाद विजय ने अपनी पार्टी की घोषणा की।

राजनीति में आने पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि धनुष ने राजनीति में आने के बारे में अभी तक सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है। उन्होंने न तो अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत और न ही आरएसएस नेता के साथ अपनी मुलाकात के बारे में कोई टिप्पणी की है। जो कुछ है वह पर्दे के पीछे और दबी जुबान में है। बावजूद इसके तमिलनाडु में सियासी हलचल जिस तरह से हो रही है, उससे धनुष के बारे में अटकलें तेज हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा लगता है कि धनुष भी एक्टर विजय के नक्शे कदम के रास्ते पर चलने की तैयारी कर रहे हैं। सवाल यह भी पूछे जा रहे हैं कि तमिलनाडु की राजनीति में यदि धनुष की एंट्री होती है तो इससे किसका राजनीतिक फायदा हो सकता है।

2,500 से अधिक महिलाओं से मुलाकात की

रविवार को यह सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गया, जब अभिनेता धनुष ने चेन्नई के बाहरी इलाके में स्थित एक निजी कॉलेज में अपने नवगठित संगठन धनुष नरपणि इयक्कम से जुड़ी 2,500 से अधिक महिलाओं से मुलाकात की। सफेद शर्ट और धोती पहने धनुष ने समर्थकों का अभिवादन करने, उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने और चांदी के कामाक्षी दीपक बांटने में कई घंटे बिताए। कुछ महिलाएं दूर-दराज के जिलों से आई थीं और भारी बारिश के बावजूद इंतजार करती रहीं। एक समर्थक ने कहा कि धनुष से मिलने के बाद उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। एक अन्य महिला इस बात से निराश थी कि वह धनुष को गाते हुए ठीक से सुन नहीं पाई, लेकिन इस बात से खुश थी कि अभिनेता ने उसे गले लगाया।

विजय से कितनी मिलती-जुलती है धनुष की रणनीति?

धनुष के प्रशंसक नेटवर्क में हुए संगठनात्मक बदलाव उनके राजनीति में आने की संभावना से जुड़े सवालों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। पहले उनके फैन क्लब धनुष नरपणि मंड्रम के नाम से संचालित होते थे। अब इन्हें एक नए नाम धनुष नरपणि इयक्कम, यानी धनुष वेलफेयर मूवमेंट, के तहत संगठित किया गया है। कोयंबटूर में राज्यस्तरीय आयोजकों की एक बैठक में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इन चर्चाओं से परिचित लोगों के मुताबिक, धनुष अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों को टेलीविजन पर अधिक कवरेज दिलाने के तरीकों पर भी विचार कर रहे थे। इससे संकेत मिलता है कि वह अपने प्रशंसकों के दायरे से आगे बढ़कर एक व्यापक संचार नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं।

विजय की राजनीतिक तैयारियों से समानता

विजय के फैन क्लब धीरे-धीरे विजय मक्कल इयक्कम नामक जन आंदोलन में बदल गए थे। इस संगठन ने कल्याणकारी गतिविधियां शुरू कीं और जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत की। बाद में यही संगठन उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की नींव बना। विजय ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम भी आयोजित किए। इससे उन्हें ऐसा सार्वजनिक मंच मिला, जो न तो फिल्म प्रचार तक सीमित था और न ही स्पष्ट रूप से राजनीतिक रैली था। इस तरह की पहल ने एक अभिनेता को लोगों से केवल अपने प्रशंसकों के रूप में नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक मतदाताओं के रूप में जुड़ने का अवसर दिया। फैन क्लब इसलिए मौजूद होता है क्योंकि लोग किसी सितारे को पसंद करते हैं। लेकिन राजनीतिक संगठन को अंततः लोगों का इतना भरोसा जीतना पड़ता है कि वे उन समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी भी उसे सौंप सकें, जिनका समाधान तीन घंटे की फिल्म और इंटरवल से पहले एक गाने के जरिए नहीं हो सकता।

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धनुष को विजय से अलग क्या बनाता है?

धनुष अपने प्रशंसक नेटवर्क को एक संगठित ढांचे में बदलने की दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, वह वास्तव में राजनीति में उतरना चाहते हैं या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। उनका फिल्मी करियर भी उन्हें विजय से अलग तरह का राजनीतिक संभावित चेहरा बनाता है। वेंकटेश प्रभु के नाम से जन्मे धनुष ने 2002 में फिल्म थुल्लुवधो इलमई से किशोरावस्था में अभिनय की शुरुआत की थी। इस फिल्म का निर्देशन उनके पिता कस्तूरी राजा ने किया था। शुरुआती दौर में उनके दुबले-पतले शरीर और पारंपरिक नायक से अलग दिखने के कारण उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इन्हीं विशेषताओं को अपनी अभिनय शैली की ताकत बना लिया।

हिंदी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं धनुष

काधल कोंडेन, आदुकलम, वडा चेन्नई, असुरन और कर्णन जैसी फिल्मों में उन्होंने ऐसे किरदार निभाए, जिनकी ताकत अजेय होने में नहीं, बल्कि उनकी कमजोरियों, गुस्से, बुद्धिमत्ता और सीमित संसाधनों के बावजूद संघर्ष करने की क्षमता में थी। निर्देशक वेत्रिमारन के साथ उनकी साझेदारी ने उन्हें तमिल सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। फिल्म आदुकलम के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद उनका करियर हिंदी फिल्मों और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा तक पहुंचा। उन्होंने रांझणा और शमिताभ जैसी हिंदी फिल्मों में काम किया। वहीं द एक्स्ट्राऑर्डिनरी जर्नी ऑफ द फकीर और रूसो ब्रदर्स की फिल्म द ग्रे मैन जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों में भी नजर आए।

वैवाहिक जीवन का अंत भी सार्वजनिक चर्चा में रहा

धनुष की खासियत यह रही है कि उन्होंने ऐसे साधारण लोगों को पर्दे पर असाधारण बनाया, जो अक्सर बड़े संस्थागत संरक्षण से वंचित होते हैं। यह उनकी अभिनय क्षमता का फायदा है, लेकिन क्या यही खूबी उन्हें राजनीति में भी लाभ पहुंचाएगी? यह एक अलग सवाल है। धनुष और विजय की जीवन यात्राओं में कुछ दिलचस्प समानताएं भी हैं। दोनों ने अपने पिता के निर्देशन में बनी फिल्मों से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। दोनों ने रजनीकांत के प्रति सार्वजनिक रूप से प्रशंसा व्यक्त की है। रजनीकांत की संभावित राजनीतिक पारी कई दशकों तक तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा का विषय रही। दोनों अभिनेताओं के वैवाहिक जीवन का अंत भी सार्वजनिक चर्चा में रहा।

पर्दे पर दोनों की छवि अलग

विजय ने एक ऐसे लोकप्रिय नायक की छवि विकसित की, जिस पर दर्शक भरोसा कर सकते थे और जो किसी समस्या को हल करने के लिए सामने आ सकता था। इसके विपरीत, धनुष ने अक्सर ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया जो पहले से ही किसी समस्या में फंसा हुआ है और अपनी बची-खुची गरिमा के साथ उससे बाहर निकलने की कोशिश करता है। तमिल सिनेमा में दोनों तरह के नायकों के लिए जगह है, लेकिन चुनावी राजनीति में परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

धनुष की संभावित राजनीतिक पारी पर दलों की प्रतिक्रिया

धनुष की राजनीतिक संभावनाओं को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं उनके अपने बयानों से कहीं अधिक मुखर रही हैं। तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि ये घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक और अभिनेता को उतारने की भाजपा और आरएसएस की रणनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने इसे ‘प्लान सी’ या ‘ऑपरेशन डी’ बताया। टैगोर ने संकेत दिया कि भाजपा पहले की राजनीतिक व्यवस्थाओं और चर्चित चेहरों के जरिए राज्य में निर्णायक उपस्थिति बनाने में सफल नहीं रही है और अब मतदाताओं तक पहुंचने के लिए एक नया रास्ता तलाश रही है। तमिलनाडु के वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने धनुष के विजय के लिए गंभीर चुनौती बनने की संभावना को खारिज करते हुए तर्क दिया कि मुख्यमंत्री का राजनीतिक संगठन वर्षों की जमीनी मेहनत से तैयार हुआ है।

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धनुष को राजनीति में आने का पूरा अधिकार-DMK

वहीं, डीएमके के वरिष्ठ नेता एस. रेगुपति ने अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में धनुष को राजनीति में आने का पूरा अधिकार है, ठीक उसी तरह जैसे विजय को है। एआईएडीएमके के के. टी. राजेंद्र बालाजी ने तो अभिनेता को एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल होने का सार्वजनिक निमंत्रण भी दे दिया। रविवार के कार्यक्रम में बांटे गए चांदी के दीपक भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए। उन पर कमल का चिह्न होने के कारण भाजपा से संबंधों को लेकर अटकलें लगाई गईं। हालांकि, किसी पारंपरिक धार्मिक प्रतीक को अपने आप में चुनावी गठबंधन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

क्या राजनीति में एक और फिल्मी सितारे के लिए जगह है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तमिलनाडु में सिनेमा से राजनीति में आने वाले एक और अभिनेता के लिए पर्याप्त राजनीतिक अवसर मौजूद हैं। विजय ने जब राजनीति में प्रवेश की तैयारी शुरू की थी, तब जयललिता और एम. करुणानिधि के निधन के बाद राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का दौर चल रहा था। उनके प्रशंसक नेटवर्क, कल्याणकारी कार्यक्रमों और योजनाबद्ध सार्वजनिक कार्यक्रमों ने अंततः एक ऐसी राजनीतिक नींव तैयार की, जिसने उन्हें चुनावी चुनौती पेश करने में मदद की। आज विजय मुख्यमंत्री के पद पर हैं। भाजपा छोड़ने के बाद के. अन्नामलाई अपना स्वतंत्र राजनीतिक आंदोलन खड़ा कर रहे हैं और स्थानीय चुनावों की तैयारी में जुटे हैं। दूसरी ओर, डीएमके और एआईएडीएमके जैसे स्थापित द्रविड़ राजनीतिक दल अब भी मजबूत संगठनात्मक आधार रखते हैं।

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