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फिलहाल सेना के साए में ही रहेगी घाटी, बढ़ते आतंकवाद के कारण सरकार को बदलना पड़ा फैसला

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 17, 2023, 04:11 PM IST

Army withdrawal from J&K: अधिकारियों के मुताबिक, सेना की कुछ इकाइयों ने जम्मू क्षेत्र की पीर पंजाल पर्वत शृंखला के दक्षिणी हिस्से में सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था का जिम्मा धीरे-धीरे स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों को सौंपने की योजना बनाई थी। इस योजना को अनिश्चितकाल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

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जम्मू से सैन्य वापसी की योजना अनिश्चितकाल के लिए टली

Photo : BCCL

Army withdrawal from J&K: जम्मू के कुछ इलाकों से चरणबद्ध तरीके से सेना की वापसी की योजना फिलहाल रोक दी गई है। सीमा पार से किए जा रहे आतंकवादी हमलों के मद्देनजर सरकार ने इस योजना को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है। श्रीनगर में अधिकारियों ने यह जानकारी दी।उन्होंने बताया कि सरकार ने जम्मू के कुछ इलाकों में सेना के आतंकवाद विरोधी बल ‘राष्ट्रीय राइफल्स’ के जवानों की मौजूदगी घटाने और सुरक्षा व्यवस्था जम्मू-कश्मीर पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों के हाथों में सौंपने की योजना बनाई थी।

जम्मू क्षेत्र में सेना के तीन आतंकवाद विरोधी बल (सीआईएफ) हैं, जिनमें डेल्टा फोर्स, रोमियो फोर्स और यूनिफॉर्म फोर्स शामिल हैं। डेल्टा फोर्स डोडा क्षेत्र, रोमियो फोर्स राजौरी और पुंछ क्षेत्र तथा यूनिफॉर्म फोर्स उधमपुर व बनिहाल क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा संभालती है।

अनिश्चितकाल के लिए ठंडे बस्ते में डाली गई योजना

अधिकारियों के मुताबिक, सेना की कुछ इकाइयों ने जम्मू क्षेत्र की पीर पंजाल पर्वत शृंखला के दक्षिणी हिस्से में सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था का जिम्मा धीरे-धीरे स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों को सौंपने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि हालांकि, हालात को ध्यान में रखते हुए, खासतौर पर आतंकवादियों द्वारा 2023 में की गई हत्याओं को देखते हुए, इस योजना को अनिश्चितकाल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

इस साल आतंकवादियों ने 17 को मौत के घाट उतारा

जम्मू क्षेत्र में इस साल आतंकवादियों के हाथों कुल 17 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें सेना के 10 जवान शामिल हैं। एक जनवरी 2023 को राजौरी के धंगरी गांव में पांच नागरिक आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में मारे गए थे, जबकि दहशतगर्दों द्वारा भागने से पहले वहां छोड़े गए एक आईईडी में अगले दिन विस्फोट होने के कारण दो अन्य लोगों की जान चली गई थी। वहीं, 20 अप्रैल को पुंछ जिले की मेंढर तहसील के भट्टा दुर्रियन में आंतकवादियों ने रमजान के दौरान एक सीमावर्ती गांव में इफ्तार का सामान पहुंचाने जा रहे सेना के एक वाहन को निशाना बनाया था, जिसमें पांच जवान मारे गए थे। इसी तरह, पांच मई को राजौरी के कांडी वन क्षेत्र में आतंकवादियों द्वारा किए गए एक आईईडी विस्फोट में पांच पैरा कमांडो मारे गए थे और मेजर रैंक का एक अधिकारी घायल हो गया था।

काफी समय से हो रहा था सैन्य वापसी का विचार

जम्मू के कुछ इलाकों से सेना को वापस बुलाने के प्रस्ताव पर पिछले कुछ समय से विचार किया जा रहा था और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में एकीकृत मुख्यालय (यूएचक्यू) की ओर से अंतिम सिफारिश की जानी थी। यूएचक्यू में सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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