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पंजाब पुलिस का अब तक का सबसे बड़ा अपडेट, बताया कैसे भागा अमृतपाल

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 19, 2023, 01:19 PM IST

जालंधर सीपी का कहना है कि हमारा मकसद पंजाब में कानून व्यवस्था को बनाए रखना है। पंजाब पुलिस इसमें पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा, जल्द ही हम अमृतपाल को गिरफ्तार कर लेंगे।

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अमृतपाल सिंंह (फाइल फोटो)

Photo : ANI

Amritpal Singh News: वारिस पंजाब दे चीफ अमृतपाल के ममाले में पुलिस ने अबतक का सबसे बड़ा अपडेट जारी किया है। पुलिस ने अमृतपाल के पुलिस से बच भागने की पूरी कहानी मीडिया के साथ साझा की है। पंजाब पुलिस का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने का किसी को अधिकार नहीं है। लॉ एंड ऑर्डर के साथ खिलवाड़ करने वाले को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

जानें कैसे भागा अमृतपाल

जालंधर के पुलिस कमिश्नर केएस चहल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पुलिस ने अमृतपाल का करीब 20 से 25 किलोमीटर तक पीछा किया। हालांकि, गलियों का फायदा उठाकर अमृतपाल भागने में कामयाब रहा। उन्होंने कहा, यह एक चोर-पुलिस की खेल की तरह है, कभी वह कामयाब होते हैं, लेकिन आखिरी में हम ही कामयाब होंगे और अमृतपाल जल्द ही हमारी गिरफ्त में होगा।

पुलिस ने बरामद किए हथियार और दो कारें

जालंधर सीपी ने कहा, हमारी सर्च जारी है। हमारा मकसद लॉ एंड ऑर्डर को मेनटेन करना है, पंजाब पुलिस इसमें पूरी तरह से सक्षम है। उन्होंने बताया, हमने कई हथियार और दो कारें बरामद की हैं। हथियार वैध हैं या अवैध इसकी भी जांच की जा रही है। बता दें, पुलिस ने अमृतपाल को शनिवार को भगोड़ा घोषित किया था।

अमृतपाल के छह करीबी समर्थक गिरफ्तार

पुलिस ने अमृतपाल के छह करीबी समर्थकों को भी गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भीं बंद कर दी गई हैं, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पंजाब में धारा 144 लागू की गइ है। बता दें, शनिवार को जालंधन के मेहातपुर में पुलिस ने अमृतपाल के काफिले को पुलिस ने रोका था।

आईएसआई से भी जुड़े तार

उधर, खुफिया एजेंसियों ने भी अमृतपाल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, अमृतपाल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एजेंट है। आईएसआई समर्थित पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के द्वारा भी लगातार अमृतपाल को विदेश में बैठे खालिस्तान समर्थकों के माध्यम से फंडिंग की जा रही थी। इनका टारगेट पंजाब के युवाओं को धर्म और खालिस्तान के नाम पर बरगला कर पंजाब का माहौल बिगाड़ने का है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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