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'प्रतिबंध लगाना भाजपा सरकार की नाकामी...' सपा नेताओं को संभल जाने से रोके जाने पर अखिलेश यादव का बयान

SP Delegation to Visit Sambhal: समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे माता प्रसाद पांडे ने कहा कि उनके पास संभल डीएम का फोन आया है। उन्होंने दस तारीख तक संभल नहीं आने को कहा गया है। ऐसे में हम आगे की रणनीति तय करेंगे।

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

SP Delegation to Visit Sambhal: संभल हिंसा के मद्देनजर समाजवादी पार्टी के नेताओं का 15 सदस्यीय दल आज हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने वाला था। इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय समेत सपा नेताओं के घर पर पहरा डाल दिया। उन्हें संभल का दौरा करने से रोक दिया। इसको लेकर अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नारजगी जाहिर की है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, प्रतिबंध लगाना भाजपा सरकार के शासन, प्रशासन और सरकारी प्रबंधन की नाकामी है। ऐसा प्रतिबंध अगर सरकार उन पर पहले ही लगा देती, जिन्होंने दंगा-फसाद करवाने का सपना देखा और उन्मादी नारे लगवाए तो संभल में सौहार्द-शांति का वातावरण नहीं बिगड़ता। भाजपा जैसे पूरी की पूरी कैबिनेट एक साथ बदल देते हैं, वैसे ही संभल में ऊपर से लेकर नीचे तक का पूरा प्रशासनिक मंडल निलंबित करके उन पर साजिशन लापरवाही का आरोप लगाते हुए सच्ची कार्रवाई करके बर्खास्त भी करना चाहिए और किसी की जान लेने का मुकदमा भी चलना चाहिए। भाजपा हार चुकी है।

हमें कहीं भी जाने की आजादी- माता प्रसाद पांडे

दूसरी ओर, प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे माता प्रसाद पांडे ने कहा कि उनके पास संभल डीएम का फोन आया है। उन्होंने दस तारीख तक संभल नहीं आने को कहा गया है। ऐसे में हम आगे की रणनीति तय करेंगे। हमें कहीं भी जाने की आजादी है और यह हमारा मौलिक अधिकार है। सरकार संविधान पर भरोसा नहीं करती इसलिए वो इस तरह का कदम उठा रही है। सरकार सच्चाई के उजागर होने के डर से हमें जाने से रोक रही है।

डरी हुई है योगी सरकार

वहीं समाजवादी पार्टी ने एक्स पोस्ट पर लिखा, सपा प्रतिनिधिमंडल से डरी योगी सरकार। सत्ता के इशारे पर पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल जी को संभल जाने से रोका, घर में किया नजरबंद। संविधान और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही भाजपा सरकार। घोर निंदनीय। संभल हिंसा मामले में माता प्रसाद पांडे की अगुवाई में 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया था। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार को संभल दौरा करना था। प्रतिनिधिमंडल का काम घटना के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाना था। एक रिपोर्ट तैयार कर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपनी थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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