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फ्लाइट में 2 साल के बच्चे की बंद हो गईं सांसे, फिर जो हुआ वो चमत्कार से कम नहीं

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 28, 2023, 01:35 PM IST

AIIMS Delhi Doctors Save Baby Life In vistara: जब एयरलाइन की उड़ान यूके-814 हवा में थी, तभी दो साल के बच्चे की सांसे रुक गईं। इसके बाद हवाई जहाज के चालक दल ने आपातकालीन घोषणा कर जहाज पर मौजूद डॉक्टरों से सहायता मांगी। फ्लाइट में 5 डॉक्टर मौजूद थे, जिन्होंने बच्ची का इलाज किया।

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दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने बचाई बच्ची की जान

Photo : Twitter

AIIMS Delhi Doctors Save Baby Life In vistara: डॉक्टरों का भगवान का रूप माना जाता है। वे समय-समय पर यह साबित भी करते हैं कि उनका पेशा सबसे ऊपर है। ऐसा ही कुछ बेंगलुरू से दिल्ली आ रही विस्तारा की फ्लाइट में हुआ, जब डॉक्टरों ने हवाई यात्रा के दौरान ही न केवल बच्चे की जान बचाई बल्कि अपने डॉक्टरी पेशे को भी साबित किया।

दरअसल, जब एयरलाइन की उड़ान यूके-814 हवा में थी, तभी दो साल के बच्चे की सांसे रुक गईं। इसके बाद हवाई जहाज के चालक दल ने आपातकालीन घोषणा कर जहाज पर मौजूद डॉक्टरों से सहायता मांगी। इत्तेफाक से फ्लाइट में दिल्ली AIIMS के पांच डॉक्टर भी सफर कर रहे थे। उन्होंने कॉल का जवाब दिया और तुरंत बच्चे को बचाने में जुट गए।

दिल्ली एम्स ने दी जानकारी

दिल्ली एम्स ने इस घटना की पुष्टि की है। ट्विटर पर इस घटना की तस्वीरें भी पोस्ट की हैं। इसमें बताया गया कि डॉक्टरों की टीम इंडियन सोसाइटी फॉर वैस्कुलर एंड इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के एक सम्मेलन से लौट रही थी, तभी वह फ्लाइट में थे। पांचों में एक एनेस्थेसिस्ट और कार्डियक रेडियोलॉजिस्ट थे। एम्स दिल्ली ने एक्स पर लिखा, "यह 2 साल की सियानोटिक(जन्मजात होने वाला हृदय रोग) बच्ची थी, जिसका इंट्राकार्डियक रिपेयर के लिए ऑपरेशन किया गया था।

हाथ-पैर पड़ चुके थे ठंडे

डॉक्टरों की टीम ने जब फ्लाइट पर ही बच्ची का इलाज शुरू किया तब वह बेहोश थी। उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ चुके थे, मगर नब्ज चल रही थी। इसके बाद बच्ची को सफलतापूर्वक IV कैनुला लगाया गया, ऑरोफरीन्जियल एयरवे डाला गया। इसके बाद बच्ची की हृदय गति दोबारा शुरू हो गई। हालांकि, खतरा यहीं टला नहीं और बच्ची को कार्डियक अरेस्ट हुआ। इस बीच फ्लाइट को नागपुर के लिए डायवर्ट किया गया, लेकिन डॉक्टरों की टीम पूरे 45 मिनट तक काम करती रही। नागपुर पहुंचने के बाद बच्ची को बाल रोग विशेषज्ञ को सौंप दिया गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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