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भारत ने 2030 तक AIDS के खात्मे का रखा लक्ष्य, सरकार ने तैयार किया फॉर्मूला; जानें अभी कैसे हैं हालात

World AIDS Day: क्या आप जानते हैं कि देश में एड्स के मामले को लेकर ताजा अपडेट क्या है, भारत में इससे संबंधित कैसे हालात हैं? स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने विश्व एड्स दिवस के मौके पर बताया है कि देश में एड्स से जुड़ी मौतों में 79 प्रतिशत की कमी, नये मामले 44 फीसद घटे हैं।

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जेपी नड्डा।

AIDS-related Deaths in India: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने वर्ष 2030 तक एड्स के खात्मे के सतत विकास लक्ष्य के प्रति भारत की तेज प्रगति का ब्योरा देते हुए रविवार को बताया कि देश में एड्स से जुड़ी मौतों में 79 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि इस बीमारी के नये मामले 44 फीसद घटे हैं। नड्डा ने विश्व एड्स दिवस पर इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया कि देश में फिलहाल करीब 17.30 लाख लोग एड्स के साथ जी रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्ष 2030 तक एड्स को जड़ से मिटाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत सरकार प्रतिबद्ध है।

सरकार ने तय किया ‘95-95-95’ का फॉर्मूला

नड्डा ने बताया कि इस लक्ष्य को पाने के लिए जांच और चिकित्सा के नवीन उपाय अपनाए जाएंगे तथा एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 2017 को पूरी तरह लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि भारत सरकार ने 2030 तक एड्स के खात्मे के लक्ष्य के मद्देनजर ‘‘95-95-95’’ का फॉर्मूला तय किया है, यानी देश के 95 प्रतिशत मरीजों को पता होना चाहिए कि वे एचआईवी से संक्रमित हैं, 95 प्रतिशत मरीजों को इलाज मिलना चाहिए और एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी की दवाओं के जरिये 95 प्रतिशत मरीजों का ‘‘वायरल लोड’’ घटाया जाना चाहिए।

नड्डा ने बताया, ‘‘मैं आपके साथ यह बात साझा करना चाहता हूं कि फिलहाल देश के 81 प्रतिशत मरीजों को पता है कि वे एचआईवी से संक्रमित हैं, 88 प्रतिशत मरीजों का इलाज किया जा रहा है और 97 प्रतिशत मरीजों का वायरल लोड घटाया जा चुका है।’’ उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 के दौरान देश में एड्स के नये संक्रमणों में 44 प्रतिशत की कमी आई है और एड्स से जुड़ी मौतें 79 प्रतिशत घटी हैं। नड्डा ने यह भी बताया कि फिलहाल 0.70 प्रतिशत वैश्विक आबादी में एड्स का प्रसार है, जबकि भारत में यह 0.20 फीसद के स्तर पर है। उन्होंने कहा कि एड्स के खिलाफ देश की लम्बी लड़ाई के बाद इस बीमारी के खिलाफ मजबूत चिकित्सा तंत्र विकसित किया गया है।

'त्वचा पर टैटू (गोदना) बनवाते वक्त एहतियात बरतें'

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार मरीजों को एड्स की दवा मुफ्त में दे रही है और किसी मरीज के एचआईवी संक्रमित पाए जाते ही उसे दवा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। नड्डा ने यह भी बताया कि भारतीय दवा कंपनियां अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को एड्स की सबसे सस्ती और प्रभावी दवाओं की आपूर्ति कर रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने एड्स के खतरों के प्रति युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि वे अपनी त्वचा पर टैटू (गोदना) बनवाते वक्त एहतियात बरतें। उन्होंने कहा,‘‘आज हमें पता चल रहा है कि लोग टैटू बनवाने के कारण भी एड्स से पीड़ित हो रहे हैं। मैं युवाओं को इस खतरे के प्रति जागरूक करना चाहता हूं।’’

नड्डा ने विश्व एड्स दिवस पर लोगों से अपील की कि वे वर्जनाओं को छोड़ें और एड्स के साथ जी रहे लोगों के प्रति संवेदनशील रवैया अख्तियार करते हुए उनके मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि नियम-कानूनों के तहत यह भी सुनिश्चित किया जाए कि रोजगार और अन्य क्षेत्रों में एचआईवी संक्रमितों के साथ कोई भी भेदभाव न हो। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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