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शरद पवार-अजित पवार फिर होंगे एक? MVA में 'दरार' के बीच आदित्य ठाकरे ने राहुल गांधी से की मुलाकात; समझिए सियासत

Internal War in MVA: एमवीए में मचे घमासान के बीच आदित्य ठाकरे ने राहुल गांधी से मुलाकात की। पिछले कुछ दिनों से शरद पवार को लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। एकनाथ शिंदे ने पवार की खुलकर तारीफ की, जिसके बाद बड़े उलटफेर के दावे किए जा रहे हैं। आपको ठाकरे और राहुल की मुलाकात से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।

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आदित्य ठाकरे और राहुल गांधी मिले।

Aditya Thackeray met Rahul Gandhi: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) (राकांपा-एसपी) प्रमुख शरद पवार द्वारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सम्मानित करने के बाद विपक्षी दलों के गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) में मचे घमासान के बीच शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। आदित्य ठाकरे ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में गांधी से मुलाकात की।

आदित्य ठाकरे और राहुल गांधी के बीच क्या बात हुई?

बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने चुनाव आयोजित कराने में निर्वाचन आयोग के खिलाफ लगे आरोपों पर भी चर्चा की। आदित्य ठाकरे, अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात करेंगे, जिनकी आम आदमी पार्टी (आप) पिछले सप्ताह दिल्ली विधानसभा चुनाव हार गई थी। दिल्ली में पांच फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 70 में से 48 सीट जीतकर सत्ता हासिल की, जबकि आप को 22 सीट मिलीं।

केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने कम से कम 13 सीट पर उसकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया। पार्टी लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई।

क्या फिर से होगा महाराष्ट्र में चाचा-भतीजे का मिलन?

शरद पवार के शिंदे को ‘महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने के बाद से महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के गठबंधन एमवीए में उथल-पुथल मची हुई है। शिंदे ने 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने के लिए तत्कालीन अविभाजित शिवसेना के अधिकतर विधायकों को अपने साथ ले लिया था। शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने और बाद में उन्होंने शिवसेना पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया।

क्या शरद पवार और अजित पवार फिर से एक हो जाएंगे? ये सवाल अहम है। भाजपा, शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन ने नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, जिससे एमवीए को बड़ा झटका लगा जो लोकसभा चुनाव में राज्य में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद फिर से जीत की उम्मीद कर रहा था। शिवसेना के उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले धड़े ने शिंदे को 'गद्दार' करार दिया है और शरद पवार के पुणे स्थित एनजीओ (गैर सरकारी संगठन) ‘सरहद’ द्वारा स्थापित पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किए जाने पर हैरान है।

शरद पवार के बारे में ये क्या कह गए आदित्य ठाकरे?

आदित्य ठाकरे ने कहा, 'जो लोग महाराष्ट्र विरोधी हैं, वे राष्ट्र विरोधी हैं। हम ऐसे लोगों को सम्मानित नहीं कर सकते जो इस तरह के गंदे काम में लिप्त हैं। यह हमारे सिद्धांतों के खिलाफ है। मुझे उनके (शरद पवार के) सिद्धांतों के बारे में पता नहीं है।'

महाराष्ट्र में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में महायुति ने 288 सदस्यीय सदन में 235 सीट जीती थीं, जबकि विपक्षी दलों के एमवीए गठबंधन को 50 सीट मिली थीं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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