दिल्ली के जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को प्रदर्शन स्थल से नहीं, बल्कि लोगों के विरोध करने से परेशानी है। दीपके ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इसी तरह विरोध की आवाज दबाई गई, तो पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।
दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जंतर-मंतर को अब प्रदर्शन स्थल नहीं माना जाएगा, क्योंकि इसे पहले ही जंग का मैदान बना दिया गया है। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में आशंका जताई कि आज जंतर-मंतर को सूची से हटाया गया है और कल लोकतंत्र को ही खत्म कर दिया जाएगा।
दिल्ली में प्रदर्शन के लिए तय किए गए तीन नए स्थान
इससे पहले, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी स्थायी आदेश के तहत धरना-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन स्थान निर्धारित किए गए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं।दिल्ली पुलिस पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप
अभिजीत दीपके ने सोमवार को दिल्ली पुलिस पर उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने के दौरान उनके परिजनों और वकील को उनके ठिकाने की जानकारी नहीं थी।
दादी के निधन की सूचना देने पर पुलिस के दावे को चुनौती
दीपके ने दादी के निधन की जानकारी देने के पुलिस के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस तड़के करीब साढ़े तीन बजे गिरफ्तारी से जुड़े कागजात लेकर आई और उनसे हस्ताक्षर करने को कहा। उनका कहना है कि उन्हें अपने रिश्तेदार का नंबर निकालने तक की अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें और उनके परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। दीपके ने पुलिस की ओर से जारी वीडियो को एडिटेड बताते हुए पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को अपने वकील से बात करने का अधिकार है और उन्हें यह सुविधा नहीं दी गई।
वकील की मौजूदगी के बिना कागजात पर हस्ताक्षर करने से किया इनकार
दीपके ने दावा किया कि पुलिस ने उनसे आंदोलन के जरिए शांति भंग नहीं करने से संबंधित कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा था। उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उनके मुताबिक, उन्होंने पुलिस से कहा कि वह पढ़े-लिखे हैं और अपने वकील की मौजूदगी के बिना किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
दीपके ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें तानाशाही खत्म होती नहीं दिखेगी, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
ज्ञानेश कुमार के बचाव को लेकर केंद्र पर साधा निशाना
दीपके ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के प्रमुख का बचाव करने के लिए सरकार नागरिकों के खिलाफ सख्ती कर रही है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं और पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है और दिल्ली पुलिस सांसदों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है।
एक्स पर पोस्ट में दीपके ने सवाल उठाया कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं कि उनके बचाव में सरकार सभी के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार है।
