Pulwama Attack Accused Death: 2019 पुलवामा आतंकी हमले के एक आरोपी की मौत हो गई है। जम्मू के अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से आरोपी की मौत हुई। विचाराधीन कैदी बिलाल अहमद कुचे पुलवामा आतंकी हमले में शामिल था, जिसमें 14 फरवरी, 2019 को 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। तबियत खराब होने के बाद उसे मंगलवार तड़के किश्तवाड़ जिला जेल से जम्मू जीएमसीएच के आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया था। यहां दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई।
2020 में गिरफ्तार हुआ बिलाल
एनआईए ने पुलवामा हमले से जुड़े होने के आरोप में जुलाई 2020 में एक आरा मिल मालिक बिलाल को गिरफ्तार किया था और उस पर यूएपीए सहित कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। बिलाल पुलवामा जिले के हाजीबल-लल्हार, काकापोरा का मूल निवासी था। बिलाल इस मामले में गिरफ्तार किया गया सातवां आरोपी था। उसने अपने घर में आतंकवादियों को पनाह दी थी और उन्हें इसे ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी।
आतंकियों को हाई-एंड सेल फोन उपलब्ध कराए
उसने आतंकवादियों को उनके पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद आकाओं से संपर्क करने के लिए हाई-एंड सेल फोन भी उपलब्ध कराए थे। एजेंसी ने कहा कि इनमें से एक सेल फोन का इस्तेमाल आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने 'फिदायीन' हमले का वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए किया था। एनआईए ने दावा किया कि बिलाल पुलवामा हमले की टोह लेने के आरोपी शाकिर बशीर माग्रे को भी जानता था और इस मामले में गिरफ्तार होने वाला पहला व्यक्ति था।
18 आरोपियों के खिलाफ केस हुआ था दर्ज
अधिकारियों ने बताया कि कुचे को किश्तवाड़ जिला जेल में बीमार होने के बाद 17 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि सोमवार रात दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई। पुलवामा हमला मामले में कुचे और 18 अन्य आरोपियों के खिलाफएनआईए ने 25 अगस्त, 2020 को आरोप पत्र दायर किया था। वह इस मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों में शामिल था।
कुचे और अन्य आरोपियों शाकिर बशीर, इंशा जान और पीर तारिक अहमद शाह ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को साजो-सामान मुहैया कराया था और उन्हें अपने घरों में पनाह दी थी। आरोप पत्र रणबीर दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, विदेशी अधिनियम और जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक संपत्ति (क्षति निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दाखिल किया गया था।
इस आतंकवादी हमले में शामिल तीन पाकिस्तानियों समेत छह आतंकवादी अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए, जबकि जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर समेत छह अन्य आतंकवादी अब भी फरार हैं। एनआईए के अनुसार, पुलवामा हमला आतंकवादी संगठन के पाकिस्तान स्थित नेतृत्व द्वारा रची गई एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का नतीजा था।
