प्रलय से लेकर आकाश तक...दुनिया ने देखी कर्तव्यपथ पर भारत की ताकत, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति बने भव्य समारोह के गवाह
भारत आज अपना 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान लागू किया और इसी के साथ देश को पूर्ण गणराज्य का दर्जा मिला। यह दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय जनता की कड़ी मेहनत और संघर्ष का प्रतीक है। इसी की याद में हम हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं।
प्रलय से लेकर आकाश तक...दुनिया ने देखी कर्तव्यपथ पर भारत की ताकत, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति बने भव्य समारोह के गवाह
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समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी भारतीय लोकतंत्र के इस भव्य आयोजन के साक्षी बने। देश के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अलावा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी और देश-विदेश के कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। परेड समारोह के लिए मुर्मू और सुबियांतो, पारंपरिक बग्गी में सवार होकर कर्तव्य पथ पहुंचे। यह परंपरा 40 साल के अंतराल के बाद 2024 में फिर से शुरू की गई थी।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांतो इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे। इसके साथ ही, वह विश्व के उन चुनिंदा नेताओं की सूची में शुमार हो गए जिन्होंने पिछले सात दशकों में देश के सबसे बड़े समारोह की शोभा बढ़ाई है। सुबियांतो गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने वाले इंडोनेशिया के चौथे राष्ट्रपति हैं। इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो 1950 में, भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे।
देश की विविधता प्रदर्शित करते हुए रंग-बिरंगे परिधान पहने 300 सांस्कृतिक कलाकारों ने रविवार को यहां कर्तव्य पथ पर ‘सारे जहां से अच्छा’ की धुन पर मार्च करते हुए 76वें गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत की। ये कलाकार देश के विभिन्न हिस्सों के लोकसंगीत से जुड़े वाद्ययंत्र बजा रहे थे।
