Leg Pain During Periods Causes: कई महिलाएं हर महीने पीरियड्स के दौरान सिर्फ पेट दर्द ही नहीं बल्कि पैरों में भी दर्द, भारीपन या खिंचाव महसूस करती हैं। अक्सर लोग इसे थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे शरीर के अंदर चल रहे हार्मोनल बदलाव और ब्लड फ्लो से जुड़े कारण छिपे होते हैं। अगर यह दर्द हर महीने बढ़ता जा रहा है या बहुत तीव्र महसूस होता है, तो यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर पीरियड्स में पैरों में दर्द क्यों होता है और कब ये चिंता की बात बन सकता है।
हार्मोनल बदलाव का असर होता है पैरों पर भी
पीरियड्स के दौरान शरीर में ‘प्रोस्टाग्लैंडिन्स’ नाम का हार्मोन रिलीज होता है, जो गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है ताकि ब्लीडिंग हो सके। लेकिन जब यह हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनता है, तो इसका असर शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है, खासतौर पर पैरों की मांसपेशियों पर। इसी कारण कई महिलाओं को पैरों में खिंचाव या दर्द महसूस होता है।
ब्लड फ्लो में रुकावट बनता है दर्द की वजह
पीरियड्स के दौरान शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में हल्का बदलाव आता है। गर्भाशय में ज्यादा ब्लड फ्लो होने की वजह से पैरों में ब्लड सप्लाई थोड़ी कम हो जाती है। यह कमी मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी पैदा कर सकती है, जिससे पैरों में भारीपन, सुन्नपन या दर्द होने लगता है।
नर्व्स पर प्रेशर से भी होता है दर्द
कुछ महिलाओं में गर्भाशय का आकार या उसकी स्थिति ऐसी होती है कि पीरियड्स के दौरान वह आसपास की नसों पर दबाव डालता है। खासतौर पर ‘साइएटिक नर्व’ (जो कमर से लेकर पैरों तक जाती है) पर दबाव आने से पैरों में झनझनाहट या दर्द हो सकता है। यही कारण है कि कुछ लोगों को पीरियड्स के समय पैर और कमर में एक साथ दर्द महसूस होता है।
आयरन की कमी और कमजोरी का भी असर
पीरियड्स के दौरान ब्लड लॉस होता है, जिससे शरीर में आयरन का स्तर कम हो सकता है। आयरन की कमी से थकान और मांसपेशियों में कमजोरी बढ़ती है, जो पैरों में दर्द या खिंचाव का कारण बन सकती है। अगर दर्द के साथ चक्कर या थकान महसूस होती है, तो डॉक्टर से आयरन लेवल की जांच करवाना जरूरी है।
कब बने यह दर्द खतरे की घंटी?
अगर पीरियड्स के अलावा भी पैरों में लगातार दर्द बना रहता है, या सूजन, जलन, सुन्नपन के साथ दिखाई देता है, तो यह सिर्फ हार्मोनल कारण नहीं हो सकता। यह डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT), एंडोमीट्रियोसिस या नसों से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है ताकि समय रहते सही इलाज हो सके।
कैसे करें इस दर्द से राहत?
गर्म पानी की सिकाई, हल्की स्ट्रेचिंग, वॉकिंग और हाइड्रेशन से पैरों का दर्द काफी हद तक कम हो सकता है। साथ ही, हेल्दी डाइट, नींद और नियमित व्यायाम से हार्मोनल बैलेंस बना रहता है जिससे हर महीने होने वाला यह दर्द भी नियंत्रित किया जा सकता है।
पीरियड्स में पैरों में दर्द कोई छोटी समस्या नहीं है, यह शरीर के भीतर के कई बदलावों का संकेत हो सकता है। अगर दर्द हर महीने बढ़ रहा है या जीवन की दिनचर्या पर असर डाल रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें और स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। शरीर की हर तकलीफ कुछ कहती है बस उसे सुनने की जरूरत है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
