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AI ने दिया बांझपन से जूझते कपल्स को नया भरोसा, मशीन से आसान हुआ IVF का पूरा प्रोसेस, पैदा हो चुके 18 बच्चे

AI-Assisted IVF Brings New Hope For Infertile Couples: क्या आपने कभी सोचा है कि मशीन भी अब इंसान बना सकती है? तो बता दें कि AI की मदद से दुनिया का पहले बच्चाे का जन्म हो चुका है। यह सुनने में आपको अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन सच है। जानिए कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ काम नहीं, बल्कि जिंदगी भी रचने लगा है। AI की मदद से बच्चा कैसे हुआ और यह तकनीक कितनी कारगर है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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अब AI से होगा सफल IVF (Pic - AI SociaoPulse)

AI-Assisted IVF Brings New Hope For Infertile Couples: अब वो वक्त आ गया है जब इंसान नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने दुनिया में एक नया जीवन जन्म दिया है। सुनने में ये किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन ये हकीकत है। अप्रैल 2025 में दुनिया का पहला AI बेबी जन्मा, और अब तक 18 से ज्यादा हेल्दी बच्चे सिर्फ AI की मदद से पैदा हो चुके हैं। कॉन्सिवेबल लाइफ साइंसेज (Conceivable Life Sciences) नाम के स्टार्टअप ने ये करिश्मा किया है , जिसने IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की पूरी प्रक्रिया को ऑटोमेट करने वाला एक रोबोटिक सिस्टम बनाया है और इसका नाम है Aura।

AI ने किया डॉक्टर वाला काम काम

अभी तक IVF एक बेहद जटिल और नाज़ुक प्रक्रिया थी। इसमें डॉक्टर सूक्ष्मदर्शी (microscope) के नीचे अंडे और शुक्राणु को जोड़ते हैं। जरा सी गलती पूरी प्रक्रिया को बिगाड़ सकती है। लेकिन अब Aura नाम का AI सिस्टम ये सब रोबोटिक सटीकता से कर रहा है। इसमें कोई हाथ कांपने की स्थिति नहीं है, न ही कोई मानवीय थकान है। यह बस एकदम सटीक और सुरक्षित तरीके से जीवन की शुरुआत है।

क्या है Aura

कॉन्सिवेबल लाइफ साइंसेज की टीम ने Aura नाम का ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो IVF के 200 से ज्यादा स्टेप्स खुद संभाल सकता है। इसमें AI, रोबोटिक्स और मशीन विजन का कमाल शामिल है। यह अंडाणु और शुक्राणु के फर्टिलाइजेशन से लेकर एम्ब्रियो की ग्रोथ और इनक्यूबेशन तक सबकुछ करता है, वो भी बिना किसी मानवीय गलती के।

AI की मदद से पैदा हो चुके 18 स्वस्थ बच्चे

सबसे हैरानी की बात ये है कि यह सब सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि हकीकत है। इसके शुरुआती ट्रायल्स में 18 हेल्दी बच्चे जन्म ले चुके हैं। अब एक बड़ा 100 पेशेंट ट्रायल चल रहा है, जिसके नतीजे बेहद पॉजिटिव बताए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर ये तकनीक सफल रही तो यह IVF की दुनिया को पूरी तरह बदल देगी।

IVF का खर्च और नाकामी दोनों होंगे कम

आज के समय में IVF का एक साइकल 12,000 से 25,000 डॉलर तक का पड़ता है, और सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। लेकिन जब हर स्टेप को AI और रोबोट कंट्रोल करेंगे तो प्रक्रिया तेज, सस्ती और ज्यादा भरोसेमंद बन जाएगी। मतलब कि पेरेंट्स को बार-बार फेल होने की तकलीफ नहीं झेलनी पड़ेगी, और शायद बांझपन जैसा शब्द इतिहास बन जाए।

जीवन का सबसे मानवीय पहलू

कॉन्सिवेबल लाइफ साइंसेज अगले साल इसे अमेरिका में लॉन्च करने की तैयारी में है। सोचिए, अब जीवन निर्माण जैसी सबसे मानवीय प्रक्रिया डेटा और एल्गोरिद्म के जरिए होंगी। पहली बार AI सिर्फ हमारे जीने का तरीका नहीं बदल रहा, बल्कि यह हमारी जीवित करने में भी मदद कर रहा है।

अब साइंस फिक्शन बन रहा हकीकत

कभी हमने फिल्मों में देखा था कि मशीनें इंसान बना सकती हैं। अब ये सच हो गया है। AI ने न सिर्फ हमारी दुनिया को स्मार्ट बनाया, बल्कि उसे बढ़ाया भी है। यह कहानी तकनीक, उम्मीद और भविष्य के उस संगम की है, जहां विज्ञान और जीवन पहली बार एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ गए हैं।

AI ने अब सिर्फ काम नहीं, बल्कि जीवन को भी अपने डेटा में समा लिया है। यह इंसानियत की सबसे बड़ी वैज्ञानिक छलांग हो सकती है। क्योंकि अब AI सिर्फ हमारे साथ नहीं, बल्कि हमारे अंदर भी जन्म ले चुका है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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