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Elvish Yadav Arrested: स्नेक बाइट क्या है? इसका नशा कितना महंगा...पढ़ें वो मामला जिसमें एल्विश यादव हुए गिरफ्तार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 17, 2024, 05:31 PM IST

Elvish Yadav Arrest News: पार्टियों में स्नेक बाइट का कल्चर बहुत तेजी से जगह बना रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग ड्रग्स के आदी हो चुके हैं और जिनको इसमें मजा नहीं आ रहा वे अब नशे के लिए स्नेक बाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं। एल्विश यादव पर आरोप है कि वह इस तरह की पार्टियों में नशे के लिए सांपों का जहर उपलब्ध करवाते थे।

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एल्विश यादव गिरफ्तार

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • बीते साल नोएडा पुलिस ने एल्विश समेत छह लोगों के खिलाफ दर्ज की थी एफआईआर।
  • पांच लोगों की इस मामले में पहले ही हो चुकी है गिरफ्तारी।
  • पुलिस ने बरामद किया थाा 20ml सांप का जहर।
  • फॉरेंसिक रिपोर्ट में हुई थी जहर की पुष्टि।

Elvish Yadav Arrest News: यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी के विजेता एल्विश यादव को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी बीते साल रेव पार्टी में सांपों की तस्करी से जुड़े मामले में की गई है। एल्विश यादव पर आरोप है कि वह दिल्ली और गुडगांव की पार्टियों में नशे के लिए सांपों का जहर उपलब्ध करवाते थे और इसके लिए मोटी रकम भी वसूल करते थे। नोएडा पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

इनमें राहुल, टीटूनाथ, जयकरन, नारायण और रविनाथ शामिल हैं। पुलिस ने राहुल नाम के शख्स के पास से 20 ml जहर और 9 जहरीले सांप बरामद किए थे, इनमें 5 कोबरा, एक अजगर, दो दोमुही सांप और एक रैट स्नेक शामिल थे। पुलिस ने जहर का सैंपल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा था, जिसकी रिपोर्ट बीते महीने सामने आई थी। इस रिपोर्ट में पुष्टि हुई थी कि वो जहर करैत और कोबरा प्रजाति के सांपों का है। ये प्रजातियां काफी खतरनाक मानी जाती हैं और भारत के चार सबसे खतरनाक सांपों में भी शामिल हैं। आइए जानते हैं स्नेक बाइट क्या होती है? इसका इस्तेमाल नशे के लिए क्यों और कैसे किया जाता है? यह कितनी महंगी होती है...

रेव पार्टी और स्नेक बाइट

भारत में रेव पार्टियों पर प्रतिबंध है। रेव पार्टियों का मतलब है कि ऐसी पार्टी जहां हर गैर कानूनी चीज का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता हो। अफीम, चरस, गांजा से लेकर महंगे से महंग ड्रग्स इन पार्टियों में यूज होते हैं। हालांकि, इन पार्टियों में स्नेक बाइट का कल्चर बहुत तेजी से जगह बना रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग ड्रग्स के आदी हो चुके हैं और जिनको इसमें मजा नहीं आ रहा वे अब नशे के लिए स्नेक बाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कैसे इस्तेमाल होता है सांप का जहर?

नशा करने के लिए लोग एक से एक जहरीले सांपों के जहर का इस्तेमाल करते हैं। इसमें कोबरा जैसे खतरनाक सांप भी शामिल हैं। सांपों को पहले एक तरह का इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे इनके जहर का असर हल्का हो जाता है और यह जानलेवा भी नहीं रहता। इसके बाद लोग सांपों से खुद को कटवाते हैं। बताते हैं कि इंसान के शरीर में स्नेक बाइट का असर पांच से छह दिन तक रहता है। हालांकि, इसके इस्तेमाल से इंसान की मौत तक हो सकती है।

सांप का जहर कितना महंगा?

जानकारी के मुताबिक, रेव पार्टियों में स्नेक बाइट काफी महंगी होती है। इसकी कीमत करोड़ों तक में होती है। इसमें सबसे महंगी कोबरा की बाइट होती है, जिसके 1 एमएल जहर की कीमत 10 से 25 हजार रुपये तक होती है। बड़ी-बड़ी रेव पार्टियों में एक्सपर्ट सपेरे होते हैं, जो स्नेक बाइट दिलवाते हैं और इसके लिए मोटी रकम वसूल करते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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