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कमलनाथ क्यों हो गए कांग्रेस से नाराज? राज्यसभा की चाहत या बेटे का सियासी भविष्य...BJP ने लिख दी पूरी स्क्रिप्ट!

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Feb 18, 2024, 09:50 AM IST

Kamal Nath may Join BJP: कमलनाथ और नकुलनाथ दिल्ली पहुंच चुके हैं। कहा जा रहा है कि दिल्ली में वे भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। कमलनाथ के दक्षिणी दिल्ली स्थिति आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

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भाजपा में शामिल हो सकते हैं कमलनाथ

Photo : BCCL

Kamal Nath may Join BJP: कांग्रेस पार्टी इन दिनों अंदरूनी कलह से जूझ रही है। कई राज्यों में बड़े-बड़े नेता आलाकमान से नाराज चल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप पिछले कुछ महीनों में पार्टी के कई दिग्गज नेता कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। इनमें हालिया नाम महाराष्ट्र के पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का है। अब सियासी गलियारों में चर्चा है कि मध्य प्रदेश के दिग्गज कांग्रेसी नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इसके अलावा बेटे नकुलनाथ समेत कई कांग्रेसी नेता भी कमलनाथ के साथ जुड़ सकते हैं।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार के बाद से ही कमलनाथ को लेकर सियासी कयास लगने शुरू हो गए थे। हालांकि, एक दिन पहले ये चर्चा तब तेज हो गई जब उनके बेटे नकुलनाथ ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल से कांग्रेस का नाम हटा लिया। इस घटनाक्रम के बीच कमलनाथ और नकुलनाथ दिल्ली पहुंच चुके हैं। कहा जा रहा है कि दिल्ली में वे भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। कमलनाथ के दक्षिणी दिल्ली स्थिति आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

लिखी जा चुकी है पटकथा

सियासी गलियारों में चर्चा है कि कमलनाथ अब भाजपा के हो चुके हैं। उनके भाजपा में शामिल होने की पूरी पटकथा लिखी जा चुकी है। हालांकि, भाजपा का आलाकमान सही समय आने पर इसे अमलीजामा पहनाएगा। हालांकि, दिल्ली में कमलनाथ और भाजपा नेताओं के बीच होने वाली मुलाकात के बाद यह बात और साफ हो जाएगी कि यह तस्वीर कब तक साफ हो सकती है।

क्या है कांग्रेस नाराजगी का कारण?

कमलनाथ के बागी होने का सबसे बड़ा कारण राज्यसभा की चाहत बताई जा रही है। चर्चा है कि कमलनाथ ने खुद के लिए राज्यसभा की सीट मांगी थी, इसे कांग्रेस आलाकमान ने पूरा नहीं किया, जिससे कमलनाथ नाराज हो गए और पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया। वहीं, दूसरा बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि कमलनाथ अब अपने बेटे नकुल के सियासी करियल को सुरक्षित करना चाहते हैं, जिसके चलते वे भाजपा का दामन थाम सकते हैं। कमलनाथ चाहते हैं कि भाजपा में नकुल में कुछ बड़ी जिम्मेदारी मिले।

कांग्रेस ने नहीं की मनाने की कोशिश

वहीं, दूसरी तरफ चर्चा है कि कमलनाथ को मनाने के लिए कांग्रेस आलाकमान की ओर से अब तक कोई संपर्क नहीं साधा गया है और न ही आलाकमान उन्हें पार्टी छोड़ने से मनाना चाहता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सिंधिया की जगह उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, वह सरकार नहीं संभाल सके और उनकी जिद के चलते विधायक टूटकर भाजपा में चले गए और कांग्रेस की सरकार गिर गई।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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