Kamal Nath may Join BJP: कांग्रेस पार्टी इन दिनों अंदरूनी कलह से जूझ रही है। कई राज्यों में बड़े-बड़े नेता आलाकमान से नाराज चल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप पिछले कुछ महीनों में पार्टी के कई दिग्गज नेता कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। इनमें हालिया नाम महाराष्ट्र के पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का है। अब सियासी गलियारों में चर्चा है कि मध्य प्रदेश के दिग्गज कांग्रेसी नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इसके अलावा बेटे नकुलनाथ समेत कई कांग्रेसी नेता भी कमलनाथ के साथ जुड़ सकते हैं।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार के बाद से ही कमलनाथ को लेकर सियासी कयास लगने शुरू हो गए थे। हालांकि, एक दिन पहले ये चर्चा तब तेज हो गई जब उनके बेटे नकुलनाथ ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल से कांग्रेस का नाम हटा लिया। इस घटनाक्रम के बीच कमलनाथ और नकुलनाथ दिल्ली पहुंच चुके हैं। कहा जा रहा है कि दिल्ली में वे भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। कमलनाथ के दक्षिणी दिल्ली स्थिति आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।
लिखी जा चुकी है पटकथा
सियासी गलियारों में चर्चा है कि कमलनाथ अब भाजपा के हो चुके हैं। उनके भाजपा में शामिल होने की पूरी पटकथा लिखी जा चुकी है। हालांकि, भाजपा का आलाकमान सही समय आने पर इसे अमलीजामा पहनाएगा। हालांकि, दिल्ली में कमलनाथ और भाजपा नेताओं के बीच होने वाली मुलाकात के बाद यह बात और साफ हो जाएगी कि यह तस्वीर कब तक साफ हो सकती है।
क्या है कांग्रेस नाराजगी का कारण?
कमलनाथ के बागी होने का सबसे बड़ा कारण राज्यसभा की चाहत बताई जा रही है। चर्चा है कि कमलनाथ ने खुद के लिए राज्यसभा की सीट मांगी थी, इसे कांग्रेस आलाकमान ने पूरा नहीं किया, जिससे कमलनाथ नाराज हो गए और पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया। वहीं, दूसरा बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि कमलनाथ अब अपने बेटे नकुल के सियासी करियल को सुरक्षित करना चाहते हैं, जिसके चलते वे भाजपा का दामन थाम सकते हैं। कमलनाथ चाहते हैं कि भाजपा में नकुल में कुछ बड़ी जिम्मेदारी मिले।
कांग्रेस ने नहीं की मनाने की कोशिश
वहीं, दूसरी तरफ चर्चा है कि कमलनाथ को मनाने के लिए कांग्रेस आलाकमान की ओर से अब तक कोई संपर्क नहीं साधा गया है और न ही आलाकमान उन्हें पार्टी छोड़ने से मनाना चाहता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सिंधिया की जगह उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, वह सरकार नहीं संभाल सके और उनकी जिद के चलते विधायक टूटकर भाजपा में चले गए और कांग्रेस की सरकार गिर गई।
