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क्यों खामोश हैं बिहार के दो बाहुबली? चिराग की चाल से 'OUT' हुए सूरजभान तो ललन सिंह से 'दुश्मनी' भूले छोटे सरकार

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Mar 31, 2024, 06:39 PM IST

Lok Sabha Election 2024: मोकामा से आने वाले सूरजभान सिंह इस बार के लोकसभा चुनाव से आउट दिख रहे हैं। सूरजभान सिंह इस समय पशुपति पारस की पार्टी रालोजपा के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष हैं। रालोजपा एनडीए का हिस्सा है, लेकिन एनडीए में इस बार उसे एक भी सीट नहीं मिली है।

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अभी तक सूरजभान के परिवार से कोई भी चुनावी मैदान में नहीं

Lok Sabha Election 2024: बिहार में कोई भी चुनाव हो कुछ बाहुबलियों का बोलबाला रहता ही है। इन्हीं बाहुबलियों की लिस्ट में दो नाम प्रमुखता से हमेशा दिखते रहे हैं। मोकामा-बाढ़ से संबंध रखने वाले सूरजभान सिंह (Surajbhan Singh) और अनंत सिंह (Anant Singh) उर्फ छोटे सरकार। दोनों एक ही क्षेत्र से आते हैं और दोनों के बीच की दुश्मनी भी मशहूर रही है। अनंत सिंह, सूरजभान को उनके घर में ही मात देते रहे हैं। लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में दोनों ही बाहुबली खामोश हैं, दोनों ही मात खाए दिख रहे हैं। चुनावी मैदान में अबतक कोई नहीं उतरा है। एक का पत्ता बीजेपी ने काट दिया तो दूसरे का जदयू ने। सबसे ज्यादा घाटा सूरजभान सिंह को होता दिख रहा है।

बाहुबली सूरजभान सिंह चुनाव से 'OUT'

मोकामा से आने वाले सूरजभान सिंह इस बार के लोकसभा चुनाव से आउट दिख रहे हैं। सूरजभान सिंह इस समय पशुपति पारस की पार्टी रालोजपा के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष हैं। रालोजपा एनडीए का हिस्सा है, लेकिन एनडीए में इस बार उसे एक भी सीट नहीं मिली है। पिछले चुनाव में सूरजभान सिंह के भाई चंदन सिंह को नवादा से टिकट मिला था, वो सांसद बने थे, उससे पहले सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी मुंगेर से सांसद थीं। सूरजभान खुद विधायक से लेकर सांसद तक रह चुके हैं। फिलहाल उन्हें बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में दोषी ठहराया जा चुका है, इसलिए वो खुद चुनाव नहीं लड़ सकते। मतलब इस चुनाव में सूरजभान को कोई भी परिवार चुनावी मैदान में नहीं है, इसके बाद भी सूरजभान खामोश हैं। जबकि पहले कई ऐसे मौकों पर सूरजभान सिंह निर्दलीय मैदान में दिख चुके हैं।

surajbhan singh

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कहां चूके सूरजभान

सूरजभान सिंह एक समय में लोजपा के बड़े नेता थे, रामविलास पासवान के काफी करीब थे और पार्टी के कर्ताधर्ताओं में से एक, लेकिन जब रामविलास पासवान की मौत हुई और पशुपति पारस ने पार्टी तोड़ी, भतीजे चिराग पासवान को छोड़ दिया तो सूरजभान सिंह भी पशुपति पारस के साथ रहे। कहा गया कि सूरजभान भी इस खेल के पीछे थे, पशुपति पारस केंद्र में मंत्री बने और सूरजभान की राजनीति चमकती रही। लेकिन जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आया, चिराग मजबूत होते गए। कहा जाता है कि चिराग ने बीजेपी के सामने शर्त रखी थी, या तो चाचा या तो वो। बीजेपी ने भविष्य को देखते हुए चिराग को अपने साथ मिला लिया। फिर चिराग ने ऐसा खेल खेला कि सूरजभान की पार्टी को एक भी सीट एनडीए में नहीं मिली। सूरजभान सीधे तौर पर चिराग पासवान के खिलाफ थे, इसलिए उनके परिवार को टिकट नहीं मिला, जबकि पारस गुट की ही एक सांसद वीणा देवी को चिराग ने वैशाली से टिकट दे दिया।

अनंत सिंह भी खामोश

बिहार में छोटे सरकार के नाम से जाने जाने वाले बाहुबली नेता अनंत सिंह भी इस बार के लोकसभा चुनाव से दूर हैं। कुछ दिनों पहले अनंत सिंह ने जब नीतीश कुमार के साथ-साथ पाला बदला और राजद छोड़ जदयू के साथ आ गए तो ऐसी चर्चा उठी कि अनंत सिंह अपनी पत्नी नीलम देवी को, जो अभी मोकामा से विधायक हैं, मुंगेर लोकसभा सीट से उतार सकते हैं। लेकिन जब टिकटों की घोषणा हुई तो बाजी उनके प्रतिद्वंदी ललन सिंह मार गए और नीलम देवी को टिकट नहीं मिला। अनंत सिंह खुद चुनाव नहीं लड़ सकते हैं क्योंकि उन्हें एक मामले में सजा हो चुकी है।

anant singh

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ललन सिंह को टक्कर दे चुकी है नीलम देवी

पिछले चुनाव में ललन सिंह के खिलाफ नीलम देवी कांग्रेस से चुनाव लड़ी थी। दोनों के बीच बड़ी अदावत देखने को मिली थी, हालांकि नीलम देवी हार गई थी। इस बार कहा जा रहा था कि अनंत सिंह, पहले ही ललन सिंह पटखनी दे देंगे और मुंगेर से एनडीए के उम्मीदवार नीलम देवी होगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। टिकट नहीं मिलने के बाद और ललन सिंह के बाजी जीतने के बाद भी अनंत सिंह खामोश हैं।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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