Lok Sabha Election 2024: गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी द्वारा दायर अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई 27 मई तक के लिए टाल दी है। अंसारी ने गाजीपुर की एक अदालत द्वारा गैंगस्टर कानून के एक मामले में दोषसिद्धि एवं चार साल की सजा को चुनौती दी है। बीते वर्ष दिसंबर माह में सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के गैंगस्टर अधिनियम के एक मामले में सांसद अफजाल अंसारी की दोषसिद्धि को सशर्त निलंबित कर दी थी।
किस केस में अफजाल अंसारी ने लगाई है गुहार?
पांच बार के विधायक और दो बार के सांसद अफजाल अंसारी को राहत मिलेगी या नहीं, फिलहाल तय नहीं हो सका है। ये वही केस है जिसमें अफजाल को चार साल की सजा हुई थी, जिसके चलते उनकी लोकसभा सदस्यता छिन गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद फिर से उनकी संसद सदस्यता बहाल को गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले का क्या पड़ेगा असर?
वर्ष 2005 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद गैंगस्टर कानून के तहत अफजाल पर यह मामला दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट का निर्णय गाजीपुर लोकसभा सीट से अफजाल की उम्मीदवारी को प्रभावित कर सकता है जहां से वह समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में है। यदि उच्च न्यायालय निचली अदालत के फैसले को सही ठहराता है तो अफजाल चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाएंगे। गाजीपुर में एक जून को मतदान है।
अफजाल के वकील दाखिल करेंगे जवाब
मौजूदा अपील के साथ ही यह अदालत इसी मामले में अफजाल की सजा बढ़ाने की राज्य सरकार और कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय की याचिका पर भी सुनवाई कर रही है। इससे पूर्व, मंगलवार को अफजाल के वकीलों ने अपनी बहस पूरी की थी। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की तरफ से राज्य सरकार के वकीलों और कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय के वकीलों ने अपनी बहस पूरी की। अब अफजाल के वकील सोमवार को जवाब दाखिल करेंगे।

अफजाल अंसारी।
सांसदों-विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली एक अदालत ने 29 अप्रैल, 2023 को अफजाल को गैंगस्टर कानून के मामले में दोषी करार दिया था और उसे चार साल की जेल की सजा सुनाई थी और एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने अफजाल के भाई मुख्तार अंसारी को भी दोषी करार देते हुए उसे 10 वर्ष की जेल की सजा सुनाई थी।
कौन है अफजाल अंसारी?
पांच बार विधायक और दो बार सांसद, अफजाल अंसारी की अपनी यही एक सबसे बड़ी पहचान है। अंसारी का परिवार बेहद संपन्न रहा है। उनके दादा मुख्तार अहमद अंसारी वर्ष 1926 से 1927 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के अध्यक्ष रहे। ये वही नाम है जो नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापकों में से एक थे। अफजाल और मुख्तार के पिता का नाम सुभानुल्लाह अंसारी, जो गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद नगर पालिका परिषद के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी अफजाल अंसारी के चचेरे भाई हैं।
अफजाल अंसारी... ये वही नाम है जिसके भाई का नाम मुख्तार अंसारी है। एक ऐसा दौर था जब जरायम की दुनिया में मुख्तार के काले कारनामों की दहशत से हर कोई खौफ के साए में जीने को मजबूर था। मगर अब वक्त बदल चुका है, वो अपराधी अब इस दुनिया में नहीं है। हाल ही में मुख्तार की जेल में तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। अब देखना होगा कि उन्हें राहत मिलती है या चुनाव से पहले झटका लगता है। हालांकि अफजाल की बेटी ने भी इस सीट से अपना निर्दलीय नामांकन दाखिल कर रखा है।
कैसा रहा अफजाल अंसारी का सियासी सफर?
| पद का नाम | कार्यकाल | पार्टी |
| मोहम्मदाबाद से विधायक | 1985-1989 | भाकपा |
| मोहम्मदाबाद से विधायक | 1989-1991 | भाकपा |
| मोहम्मदाबाद से विधायक | 1991-1993 | भाकपा |
| मोहम्मदाबाद से विधायक | 1993-1996 | भाकपा |
| मोहम्मदाबाद से विधायक | 1996-2002 | सपा |
| गाज़ीपुर से सांसद | 2004-2009 | सपा |
| गाज़ीपुर से सांसद | 2019-2024 | बसपा |
अफजाल अंसारी के परिवार को जानिए
गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी की शादी 26 अक्टूबर 1991 को फरहत अंसारी से हुई थी। अफजाल और फरहत की तीन बेटियां हैं। जिनमें से नुसरत चुनावी मैदान में हैं। वहीं अफजाल के बड़े भाई का नाम सिबगतुल्लाह अंसारी है, जो समाजवादी पार्टी के नेता और मोहम्मदाबाद के पूर्व विधायक हैं। अफजाल के परिवार का सबसे खूंखार सदस्य उनका छोटा भाई मुख्तार अंसारी था। जो माफिया डॉन था और इसने हत्या, अपहरण जैसे संगीन अपराधों को अंजाम दिया। फिलहाल अब वो इस दुनिया में नहीं है।
मनोज सिन्हा को हर दो बार हराया
साल 2004 की बात है, जब अफजाल अंसारी ने समाजवादी पार्टी से नाता जोड़ लिया था। लोकसभा चुनाव में उसकी टक्कर तत्कालीन गाजीपुर से भाजपा के सांसद मनोज सिन्हा से हुई। इस चुनाव में अफजाल ने सिन्हा को 226,777 वोटों से करारी शिकस्त दी। इसके बाद वो अगले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी से जुड़ गया और एक बार फिर गाजीपुर से ही लोकसभा चुनाव लड़ा, मगर इस बार उसे सपा के राधे मोहन सिंह ने हरा दिया। उसने बसपा छोड़कर अपनी राजनीतिक पार्टी कौमी एकता दल बनाई। मगर 2017 में उसने अपनी पार्टी का बसपा में विलय कर लिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी आमने सामने थे। इस वक्त सिन्हा केंद्र की मोदी सरकार में दो-दो मंत्रालय में मंत्री पद संभाल रहे थे। मगर सपा-बसपा की जोड़ी ने फिर से सिन्हा को हार झेलने पर मजबूर कर दिया।
