What is Ceasefire? इजरायल और ईरान के बीच करीब दो सप्ताह से जारी युद्ध को खत्म कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'पूरी तरह से सीजफायर' की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि दोनों देश सीजफायर पर सहमत हो गए हैं और उनकी इस सहमति से 12 दिनों से जारी जंग आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागची ने कहा है कि इजरायल अपनी 'अनुचित आक्रामकता' को यदि रोक देता है तो 'ईरान अपनी जवाबी कार्रवाई जारी रखने का इरादा नहीं रखता है।' विदेश मंत्री ने कहा कि हमले रोकने पर सहमति अथवा सीजफायर जैसी कोई बात नहीं हुई है। इस बारे में बाद में निर्णय लिया जाएगा।
क्या होता है सीजफायर?
सीजफायर (युद्धविराम) विशेष रूप से एक अस्थायी या स्थायी समझौता होता है, जिसके तहत संघर्षरत पक्ष लड़ाई को रोकने पर सहमत होते हैं। कुछ युद्धविराम औपचारिक रूप से संधियों के माध्यम से होते हैं, जबकि अन्य अनौपचारिक रूप से तय किए जाते हैं। सीजफायर लागू कराने में अक्सर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता होती है। बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ। यह सीजफायर दोनों देशों के डीजीएमओ स्तर पर बातचीत के बाद लागू हुआ। सीजफायर के समझौते राज्य या गैर-राज्य पक्षों के बीच हो सकते हैं और कभी-कभी इन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के माध्यम से लागू किया जाता है।

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सीजफायर एकतरफा नहीं हो सकता
सीजफायर (युद्धविराम) एकतरफा नहीं हो सकता। इसकी सफलता दोनों पक्षों की सहमति और इसका पालन करने पर निर्भर करती है। खास बात ये है कि इसमें किसी भी तरह की संधि की जरूरत नहीं होती है, बल्कि इसके लागू होना फैसला दोनों देशों की आपसी सहमति पर निर्भर रहता है। यह बाध्यकारी भी नहीं होता। कोई भी पक्ष किसी भी वक्त इसे तोड़ सकता है।
सीजफायर लागू होने के बाद क्या होता है?
सीजफायर लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच जारी सैन्य कार्रवाई पर अस्थाई और स्थाई तौर पर रोक लग जाती है। दोनों देशों के जरिए आपसी तनाव खत्म करने के लिए समय और दायरे सहित शर्तों पर सहमति व्यक्त की जाती है। सीजफायर लागू करने के लिए सैन्य कमान शृंखला में निर्देश दिए जाते हैं। युद्ध विराम को लागू करने के लिए सैन्य कमान की श्रृंखला में निर्देश दिए जाते हैं। सीजफायर लागू होने में महानिदेशक मिलिट्री ऑपरेशन (DGMO) भी अहम भूमिका अदा करते हैं। इसके पूर्ण अनुपालन की जांच करने के लिए निगरानी व्यवस्था भी की जा सकती है।

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भारत-पाक के बीच कब बनी सीजफायर पर सहमति?
अगर, भारत और पाकिस्तान के बीच पहली बार सीजफायर फैसले की बात करें तो जब 1947 में कश्मीर के लिए दोनों देशों के बीच जंग हुई तो यूनाइटेड नेशन ने युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थता की। यूएन के हस्तक्षेप के बाद 1949 में भारत-पाकिस्तान ने सहमति से जम्मू-कश्मीर पर एक लाइन स्थापित की, जिसे सीजफायर लाइन माना जाता है। इस लाइन पर सहमित बनाने के लिए भारत और पाकिस्तान के तत्कालीन आर्मी चीफ ने बैठक की थी। सीजफायर लागू करवाने के लिए अक्सर संयुक्त राष्ट्र जैसी तटस्थ संस्थाएं, हॉटलाइन या जॉइंट मिलिट्री कमेटी, और तीसरे देशों के निगरानी दल (जैसे अमेरिका) लगाए जाते हैं। अगर कोई गोलीबारी, उल्लंघन या झूठा प्रचार होता है, तो सीजफायर टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
कई बार हो चुका है सीजफायर का उल्लंघन
लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) पर बने बैरियर्स समझौते के मुताबिक दोनों देशों की सरकारों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि वे एक-दूसरे के खिलाफ दुष्प्रचार रोकने कोशिश करेंगी। दोनों ही देश इंटरनेशनल बॉर्डर तैनात की गई सेना को हटा लेंगे। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर समझौते का कोई असर तब से लेकर अब तक नजर नहीं आया। पाकिस्तान की तरफ से कई बार इस सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया जा चुका है।
