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राहुल और पवार के बीच सीट बंटवारे पर बनी बात? जानें अब कांग्रेस की राह में कौन-कौन रोड़ा

Lok Sabha Chunav: विपक्षी दलों के गठबंधन की चार बैठकें हो चुकी हैं, मगर अब तक सीट बंटवारे का फॉर्मूला सेट नहीं हो सका है। ऐसे में सबसे बड़ी चिंता कांग्रेस के लिए है, क्योंकि बीते विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मिली करारी शिकस्त के चलते उसका कद काफी कमजोर हुआ है।

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कब सेट होगा सीट बंटवारे का फॉर्मूला?

Photo : Times Now Digital

Sharad Pawar With Rahul Gandhi: शह और मात का खेल भले ही शतरंज में होता है, मगर सियासत का सबसे दमदार नियम यही है। यहां कोई किसी का सगा नहीं होता, समय बदलते ही अच्छे से अच्छे वफादार नेता भी पाला बदल लेते हैं। लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है, विपक्षी गठबंधन एकता के दावे कर रहा है, मगर अब तक इस गठबंधन में शामिल दलों के बीच सीट बंटवारे पर समझौता नहीं हो पाया। सीट बंटवारे के फॉर्मूले में हो रही देरी कहीं न कहीं इस ओर इशारा कर रही है कि मैं बड़ा-मैं बड़ा वाला मामला अटक रहा होगा।

विपक्षी गठबंधन के बीच कब सेट होगा सीट बंटवारे का फॉर्मूला?

क्षेत्रीय पार्टियां अपना खेमा मजबूत रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटें की चाहत पाले बैठी हैं, तो वहीं इस गठबंधन में शामिल सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस की इसी सोच में होगी कि उसके खाते में अधिक सीटें आएं। इसी बीच कभी नीतीश के नाराज होने की खबर आती है, तो कभी ममता बनर्जी उखड़ जाती हैं। सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव भी कांग्रेस से खफा-खफा दिखते हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच छिड़ तनातनी किसी से नहीं छिपी है। इसी बीच शुक्रवार को राहुल गांधी ने शरद पवार से मुलाकात की और सीटों के मुद्दे पर चर्चा की।

राहुल और पवार की मुलाकात, सीट बंटवारे पर बनी बात?

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCR) के प्रमुख प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में सीट बंटवारे पर शुक्रवार को चर्चा की। दरअसल, 146 सांसदों के निलंबन का विरोध करते हुए संयुक्त विपक्ष ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया, इसी के बाद राहुल गांधी, शरद पवार के साथ उनके 6 जनपथ स्थित आवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में कुछ समय के लिए बातचीत हुई। सूत्रों ने ऐसा दावा किया है कि इन दोनों नेताओं के बीच महाराष्ट्र में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा हुई।

सीट बंटवारे को लेकर क्या है शरद पवार की चाहत?

लोकसभा चुनाव के लिए राहुल और पवार ने महाराष्ट्र विकास आघाड़ी के सहयोगियों शिव सेना (यूबीटी), कांग्रेस और राकांपा के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा की। ऐसा कहा जा रहा है कि शरद पवार विपक्षी गठबंधन में वाम दलों, पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी और वंचित बहुजन आघाड़ी जैसे छोटे दलों को भी शामिल करने के पक्ष में हैं। पवार की ऐसी चाहत है कि महाराष्ट्र में सीट बंटवारे को जल्द से जल्द फॉर्मूला सेट कर लिया जाए, जिससे लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए गठबंधन की संयुक्त सभाएं आयोजित की जा सकें।

चौथी बैठक में भी खाली हाथ लौटे नेता, फैसला कब?

बीते 19 दिसंबर, 2023 को विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के घटक दलों के प्रमुख नेताओं ने देश की राजधानी दिल्ली में बैठक की। इस दौरान अगले लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे, साझा जनसभाओं और नए सिरे से रणनीति बनाने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि पिछली तीन बैठकों की तरह इस बार भी सभी नेताओं के हाथ खाली रह गए, मतलब सीट बंटवारे को लेकर फाइनल फैसला नहीं हो सका। हालांकि ये दावा किया जा रहा है कि इस बैठक में ये फैसला किया गया कि जनवरी, 2024 के दूसरे सप्ताह तक सीट बंटवारे को अंतिम रूप देना है। बता दें, पटना, बेंगलुरु और मुंबई के बाद दिल्ली में आयोजित की गई गठबंधन की ये चौथी बैठक थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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