QRSAM Air Defence Missile System: पिछले एक दशक से भारत की रक्षा तैयारियों का असर अब साफ दिखने लगा है। भारत ने हथियार निर्माण और निर्यात में बड़ी सफलता हासिल की है। इसके साथ ही हथियारों के मामले में आत्मनिर्भरता को बढ़ाते हुए पाकिस्तान के साथ हालिया संघर्ष में दुश्मन को धूल भी चटाई। जहां पाकिस्तान चीन और तुर्की के हथियारों के दम पर भारत को आंखें दिखा रहा था, भारत ने अधिकतर स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर पाकिस्तान का हर मंसूबा नाकाम करते हुए उसके वायुसेना को तगड़ी चोट पहुंचाई।
30,000 करोड़ रुपये की लागत
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना को 30,000 करोड़ रुपये की लागत वाला नया एयर डिफेंस सिस्टम मिलने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जल्द ही एक नई सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली के अधिग्रहण को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी विमान, मिसाइल और ड्रोन हमलों को पूरी तरह नाकाम कर दिया था।
तीन रेजिमेंट खरीदने के प्रस्ताव पर विचार
रक्षा अधिकारियों ने एएनआई को बताया कि रक्षा मंत्रालय देश की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर तैनाती के लिए सेना की वायु रक्षा के लिए स्वदेशी क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम (QRSAM) की तीन रेजिमेंट खरीदने के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है। रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक जून के चौथे सप्ताह के आसपास आयोजित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा विकसित किया जाने वाले ये मिसाइल सिस्टम अत्यधिक मोबाइल है और इनमें चलते हुए लक्ष्यों को खोजने और ट्रैक करने और कम समय में फायर करने की क्षमता है। लगभग 30 किमी की रेंज के साथ यह सिस्टम कम से मध्यम दूरी में MRSAM और आकाश जैसी सेनाओं में मौजूदा डिफेंस सिस्टम का पूरक होगा। ट्रायल के दौरान दिन और रात दोनों परिचालन परिदृश्यों में मिसाइल प्रणाली के प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया गया है।
क्या है QRSAM?
- क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM) एक अत्याधुनिक, स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली है जिसे हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के सहयोग से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित यह सिस्टम युद्ध के मैदान में तेजी से तैनाती के लिए अनुकूलित है।
- 8x8 हाई-मोबिलिटी अशोक लीलैंड डिफेंस सिस्टम वाहन पर स्थापित QRSAM चलते-फिरते या छोटे पड़ावों से फायर कर सकता है, जिससे भारतीय सेना को युद्धाभ्यास के दौरान निरंतर हवाई कवर मिलता है।
- एक्टिव एरे बैटरी सर्विलांस रडार और एक्टिव एरे बैटरी मल्टीफ़ंक्शन रडार - दोनों ही कई हवाई लक्ष्यों का पता लगाने, ट्रैकिंग करने और एक साथ जुड़कर 360-डिग्री कवरेज देते हैं।
रेंज और ताकत
QRSAM को 25 से 30 किलोमीटर की रेंज में और 10 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें Ku और X दोनों फ़्रीक्वेंसी बैंड में काम करने वाला एक स्वदेशी सक्रिय रडार सीकर लगा है, जो एक लेजर प्रॉक्सिमिटी फ्यूज के साथ मिलकर हिट की सटीकता को बढ़ाता है और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग की भेद्यता को कम करता है।
दिन और रात के संचालन के लिए डिजाइन किया गया, QRSAM तेज गति से उड़ने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को बेअसर कर सकता है, जिससे यह आधुनिक हवाई खतरों के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी हो जाता है। एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने की इसकी क्षमता दुश्मन के खिलाफ मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
आकाश और MRSAM ने पाकिस्तान को धूल चटाई
पाकिस्तान के साथ चार दिन के संघर्ष के दौरान भारतीय सेना की वायु रक्षा यूनिट ने एल-70 और का इस्टेमाल करके अधिकांश ड्रोन को नष्ट कर दिया था। Zu-23 वायु रक्षा तोपें जबकि आकाश और MRSAM ने भारतीय वायु सेना के स्पाइडर और सुदर्शन एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों के साथ अहम भूमिका निभाई। सेना को तुर्की और चीनी मूल के ड्रोन से निपटने के लिए कई नए रडार, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के साथ-साथ जैमर और लेजर-आधारित सिस्टम भी मिल रहे हैं।
