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हिमाचल की अंदरूनी कलह न बन जाए BJP के लिए मुसीबत, नेताओं की नाराजगी दे सकती है डबल झटका

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 9, 2024, 05:55 PM IST

Himachal Pradesh: कांग्रेस से बगावत करने वाले छह नेताओं को बीजेपी ने उपचुनाव के लिए टिकट दे दिया है। टिकट देने की घोषणा के बाद उन भाजपा नेताओं में नाराजगी नजर आ रही है जो इन कांग्रेस विधायकों के हाथों 2022 में विधानसभा चुनाव हार गये थे। जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला है, उनके ज्यादातर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी समझे जाते हैं।

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भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा

Photo : Twitter

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश को आने वाले दिनों में एक नहीं दो-दो चुनौतियों से निपटना है। यहां लोकसभा चुनाव के साथ-साथ कांग्रेस के बागी हुए छह विधायकों की अयोग्यता के बाद खाली हुई छह सीटों पर उपचुनाव भी हैं। हालांकि, इन चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी अंदरूनी कलह से जूझ रही है। पार्टी के नेता विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के छह बागियों को टिकट देने से नाराज हैं।

बता दें, विधानसभा उपचुनाव के वास्ते कांग्रेस के सभी छह बागियों को टिकट देने की घोषणा के बाद उन भाजपा नेताओं में नाराजगी नजर आ रही है जो इन कांग्रेस विधायकों के हाथों 2022 में विधानसभा चुनाव हार गये थे। जिन भाजपा नेताओं को इस विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं मिला है, उनमें ज्यादातर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी समझे जाते हैं।

उठने लगे बगावत के सुर

हिमाचल प्रदेश भाजपा में बगावत के सुर भी फूटने लगे हैं। दरअसल, सुजानपुर से रंजीत सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपचुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। वह 399 मतों के अंतर से 2022 का विधानसभा चुनाव राजिंदर राणा के हाथों हार गये थे। वहीं, बरसार से माया शर्मा, कुतलेहार से पूर्व मंत्री वरिंदर कंवर और गागरेट से राजेश ठाकुर टिकट नहीं मिलने से खिन्न हैं।

धूमल के गांव के चक्कर काट रहे दिग्गज नेता

टिकट वितरण की घोषणा के तत्काल बाद पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल और उपचुनाव प्रत्याशी राजिंदर राणा एवं इंदर दत्त लखनपाल समेत वरिष्ठ पार्टी नेता धूमल का आशीर्वाद पाने के लिए उनके पैतृक गांव समीरपुर के चक्कर लगाने में जुट गये हैं। चूंकि चार विधानसभा उपचुनाव हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में होने वाले हैं और यह संसदीय क्षेत्र धूमल के बेटे एवं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का गढ़ है, ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा लोकसभा चुनाव एवं विधानसभा उपचुनाव में अहम भूमिका निभाये जाने की संभावना है। बता दें, धूमल को 2017 में भाजपा के मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया गया था लेकिन वह राजिंदर राणा से चुनाव हार गये थे। अब धूमल को अपने प्रतिद्वंद्वी राणा का समर्थन करना है तथा राणा से अनुराग ठाकुर का समर्थन किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व उन पार्टी नेताओं को समझाने का प्रयास कर रहा है जो टिकट वितरण से नाराज हैं। उन्होंने कहा, उन्होंने कहा कि वे मान जायेंगे क्योंकि भाजपा कैडर आधारित पार्टी है।

बदला हिमाचल प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य

बता दें, राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस के प्रत्याशियों के हार जाने के बाद हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के छह बागियों समेत नौ विधायकों ने भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन के पक्ष में मतदान किया था। इन विधायकों में तीन निर्दलीय हैं। कांग्रेस के बागियों में सुधीर शर्मा (धर्मशाला), राजिंदर राणा (सुजानपुर), इंदर दत्त लखनपाल (बरसार), चेतन्य शर्मा (गागरेट), देविंदर कुमार भुटू (कुतलेहार) और रवि ठाकुर (लाहौल एवं स्पीति) को विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में मौजूद रहने तथा कटौती प्रस्ताव एवं बजट पर मत विभाजन में सरकार के पक्ष में मतदान करने के व्हिप का उल्लंघन करने को लेकर (सदन की सदस्यता के लिए) अयोग्य ठहरा दिया था। बाद में कांग्रेस के ये बागी भाजपा में चले गये और उन्हें विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट दे दिया गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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