Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश को आने वाले दिनों में एक नहीं दो-दो चुनौतियों से निपटना है। यहां लोकसभा चुनाव के साथ-साथ कांग्रेस के बागी हुए छह विधायकों की अयोग्यता के बाद खाली हुई छह सीटों पर उपचुनाव भी हैं। हालांकि, इन चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी अंदरूनी कलह से जूझ रही है। पार्टी के नेता विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के छह बागियों को टिकट देने से नाराज हैं।
बता दें, विधानसभा उपचुनाव के वास्ते कांग्रेस के सभी छह बागियों को टिकट देने की घोषणा के बाद उन भाजपा नेताओं में नाराजगी नजर आ रही है जो इन कांग्रेस विधायकों के हाथों 2022 में विधानसभा चुनाव हार गये थे। जिन भाजपा नेताओं को इस विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं मिला है, उनमें ज्यादातर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी समझे जाते हैं।
उठने लगे बगावत के सुर
हिमाचल प्रदेश भाजपा में बगावत के सुर भी फूटने लगे हैं। दरअसल, सुजानपुर से रंजीत सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपचुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। वह 399 मतों के अंतर से 2022 का विधानसभा चुनाव राजिंदर राणा के हाथों हार गये थे। वहीं, बरसार से माया शर्मा, कुतलेहार से पूर्व मंत्री वरिंदर कंवर और गागरेट से राजेश ठाकुर टिकट नहीं मिलने से खिन्न हैं।
धूमल के गांव के चक्कर काट रहे दिग्गज नेता
टिकट वितरण की घोषणा के तत्काल बाद पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल और उपचुनाव प्रत्याशी राजिंदर राणा एवं इंदर दत्त लखनपाल समेत वरिष्ठ पार्टी नेता धूमल का आशीर्वाद पाने के लिए उनके पैतृक गांव समीरपुर के चक्कर लगाने में जुट गये हैं। चूंकि चार विधानसभा उपचुनाव हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में होने वाले हैं और यह संसदीय क्षेत्र धूमल के बेटे एवं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का गढ़ है, ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा लोकसभा चुनाव एवं विधानसभा उपचुनाव में अहम भूमिका निभाये जाने की संभावना है। बता दें, धूमल को 2017 में भाजपा के मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया गया था लेकिन वह राजिंदर राणा से चुनाव हार गये थे। अब धूमल को अपने प्रतिद्वंद्वी राणा का समर्थन करना है तथा राणा से अनुराग ठाकुर का समर्थन किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व उन पार्टी नेताओं को समझाने का प्रयास कर रहा है जो टिकट वितरण से नाराज हैं। उन्होंने कहा, उन्होंने कहा कि वे मान जायेंगे क्योंकि भाजपा कैडर आधारित पार्टी है।
बदला हिमाचल प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य
बता दें, राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस के प्रत्याशियों के हार जाने के बाद हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के छह बागियों समेत नौ विधायकों ने भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन के पक्ष में मतदान किया था। इन विधायकों में तीन निर्दलीय हैं। कांग्रेस के बागियों में सुधीर शर्मा (धर्मशाला), राजिंदर राणा (सुजानपुर), इंदर दत्त लखनपाल (बरसार), चेतन्य शर्मा (गागरेट), देविंदर कुमार भुटू (कुतलेहार) और रवि ठाकुर (लाहौल एवं स्पीति) को विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में मौजूद रहने तथा कटौती प्रस्ताव एवं बजट पर मत विभाजन में सरकार के पक्ष में मतदान करने के व्हिप का उल्लंघन करने को लेकर (सदन की सदस्यता के लिए) अयोग्य ठहरा दिया था। बाद में कांग्रेस के ये बागी भाजपा में चले गये और उन्हें विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट दे दिया गया।
