Baharampur Lok Sabha Seat: पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों के लिए टीएमसी ने रविवार को उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। तृणमूल कांग्रेस की इस लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व क्रिकेटर युसुफ पठान का है या फिर कहें कि युसुफ पठान के नाम से ज्यादा चौंकाने वाली बात वो सीट है, जहां से युसुफ पठान अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। युसुफ पठान को टीएमसी ने बहरामपुर से टिकट दिया है, जो कांग्रेस का गढ़ है। इस घोषणा से ऐसा लग रहा है, जैसे ममता बनर्जी बंगाल में कांग्रेस को एक भी सीट जीतने नहीं देना चाहती है।
अधीर रंजन से ममता बनर्जी खफा?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ममता सरकार पर हमलावर रहे हैं। ममता सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और बंगाल में बढ़ते क्राइम को लेकर अधीर रंजन चौधरी टीएमसी पर निशाना साधते रहे हैं। अधीर रंजन चौधरी 1999 से बहरामपुर सीट पर सांसद है। अब उसी अधीर रंजन को हराने के लिए टीएमसी ने एक स्टार क्रिकेटर युसुफ पठान को मैदान में उतार दिया है। पिछले चुनाव में बहरामपुर सीट पर टीएमसी के वोट प्रतिशत में 19.61% का उछाल आया था और अधीर रंजन चौधरी के वोट प्रतिशत में 5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। जीत का अंतर भले ही 80 हजार का था लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में बहरामपुर की 7 विधानसभा में से 6 पर टीएमसी और 1 पर बीजेपी ने जीत दर्ज किया था। मतलब कांग्रेस की हालत पिछले 5 सालों में इस सीट पर खराब हुई है।
कांग्रेस को एक भी सीट नहीं जीतने देना चाहती ममता?
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को पिछले लोकसभा चुनाव में 2 सीट- बहरामपुर और मालदा दक्षिण पर जीत मिली थी। टीएमसी और कांग्रेस अकेले अकेले लड़ी थी। इस बार इंडिया गठबंधन में ममता बनर्जी शामिल थी और कांग्रेस को सिर्फ दो सीट ही बंगाल में दे रही थी, जो कांग्रेस को मंजूर नहीं था। बहरामपुर सीट पर जिस तरह से ममता ने तगड़ा उम्मीदवार उतारा है, उससे ये तो स्पष्ट है कि ममता बनर्जी कांग्रेस को उसके गढ़ में हराना चाहती है। बहरामपुर सीट से ममता किसी बड़े नेता को उतारती तो अलग बात थी, लेकिन एक स्टार को उतार कर टीएमसी ने अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं कि वो कांग्रेस को 2 सीट देकर कोई गलती नहीं कर रही थी।
कांग्रेस पर क्यों खफा ममता?
बंगाल में आज भले ही लड़ाई टीएमसी और बीजेपी के बीच है, लेकिन ममता बनर्जी कांग्रेस से भी खफा है। क्योंकि कांग्रेस की मजबूती मतलब अल्पसंख्यक वोट का टीएमसी के पास से छिटकना, मतलब बीजेपी को बढ़त। जो टीएमसी किसी कीमत पर नहीं चाहेगी।
