एक्सप्लेनर्स

Ajit Pawar vs Sharad Pawar: चाचा-भतीजे में फिर शुरू हुआ टशन, हार के बाद अजित पवार ने खोज ही लिया मौका; अब क्या करेंगे शरद पवार

Rift Between Ajit Pawar and Sharad Pawar: चाचा-भतीजे की जंग में फिलहाल भतीजा अजित पवार सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हैं, हालांकि दोनों पवार में से कौन ज्यादा पावरफुल है इसके बारे में कहने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। इस बीच शरद पवार को घेरने के लिए उनके भतीजे ने एक और मौका तलाश लिया है।

Image

शरद पवार vs अजित पवार।

Photo : Times Now Digital

Ajit Pawar Vs Sharad Pawar After LS Election: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सियासी उठापटक का दौर तेज हो चुका है। राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगा पाना बिल्कुल वैसा ही है, जैसे रेत की ढेर में सुई की तलाश करना। चाचा शरद पवार और भतीजा अजित पवार की लड़ाई में इस बार के लोकसभा चुनाव में चाचा का जलवा पूरे देश ने देखा, जबकि भतीजे की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। एनसीपी में जब दो फाड़ हुआ तो ये कहा जा रहा था कि चाचा को भतीजे ने चारो खाने चित कर दिया, लेकिन जब लोकसभा चुनाव के नतीजे आए तो चाचा ने भतीजे को धोबी पछाड़ का ट्रेलर दिखाया। अब विधानसभा चुनाव को लेकर जोर-आजमाशें तेज हो चुकी हैं। भतीजे ने इस लड़ाई का आगाज चालाकी भरे अंदाज में किया है।

अब किस विवाद में चाचा को भतीजे ने घेर लिया?

असली एनसीपी और नकली एनसीपी की लड़ाई के बीच जब लोकसभा चुनान के परिणाम आए तो शरद पवार ने अपने भतीजे को ये समझा दिया कि वो भले ही उम्र से बूढ़े हो गए हैं, लेकिन सियासी चाल के मामले में वो आज भी उनसे कई कदम आगे हैं। शायद यही वजह है कि अजित पवार इस मौके की तलाश में लगे हुए है कि कैसे ये साबित किया जाए कि उनकी एनसीपी ही असली एनसीपी है, इसके लिए वो कोशिश भी करने लगे हैं। अजित पवार ने अपने चाचा की पार्टी को जमकर कोस रहे हैं और इसकी वजह आपको समझाते हैं।

क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले शख्स से मुलाकात पर घमासान

अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने शरद पवार की पार्टी को जमकर खरी-खोटी सुनाई है। इस आलोचना की वजह ये है कि शरद पवार की NCP (SP) के एक सांसद, क्रिमिनट बैकग्राउंड वाले शख्स के घर गए। इसी को लेकर अजित पवार गुट ने सवाल उठा दिया। अहमदनगर से नवनिर्वाचित सांसद नीलेश लंके को लेकर विवाद छिड़ा है, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले एक व्यक्ति के घर जाने पर अजित पवार गुट ने राकांपा (एसपी) की आलोचना की।

अजित पवार ने चाचा से ऐसे लिया सियासत बदला

भले ही शरद पवार की पार्टी के सांसद क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले शख्स के घर इन दिनों गए हों, लेकिन ये विवाद कुछ महीने पुराना है। कुछ महीने पहले की बात है, जब राकांपा अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने हिस्ट्रीशीटर गजानन मार्ने, जिसे गज्या मार्ने के नाम से भी जाना जाता है, के घर जाकर विवाद खड़ा कर दिया था। अजित पवार ने पार्थ पवार के मार्ने के घर जाने को गलत बताया था और कहा था कि उनके बेटे को आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति से मिलने से बचना चाहिए था। इस बीच कुछ ऐसा हुआ कि अजित पवार को अपने चाचा की पार्टी से बदला लेने का मौका मिल गया।

नीलेश लंके और हिस्ट्रीशीटर मार्ने के कनेक्शन पर सवाल

सोशल मीडिया पर हाल में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें हिस्ट्रीशीटर गजानन मार्ने को पुणे स्थित अपने घर पर सांसद नीलेश लंके से मुलाकात करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद राकांपा नेता अमोल मिटकरी ने ‘गुंडे’ के घर जाने के लिए लंके की आलोचना की और बैठक के बारे में राकांपा (एसपी) प्रवक्ताओं की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाया। मिटकरी ने कहा, 'जब पार्थ पवार ने मार्ने से मुलाकात की थी, तो अजित दादा ने निराशा व्यक्त की थी। लेकिन आज नीलेश लंके मार्ने से बड़े सम्मान के साथ मिल रहे हैं और उनकी बधाई स्वीकार कर रहे हैं।'

सुजय विखे पाटिल को नीलेश लंके ने चुनाव में दी मात

अहमदनगर लोकसभा क्षेत्र में नीलेश लंके ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निवर्तमान सांसद सुजय विखे पाटिल को हराया है। मिटकरी ने इस बात को लेकर भी हैरानी जताई कि क्या राकांपा (एसपी) ने अहमदनगर और बारामती लोकसभा सीट जीतने के लिए अपराधियों की मदद ली थी। उन्होंने कहा, 'इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या राकांपा (एसपी) को चुनाव में मार्ने की मदद मिली थी।'

अजित पवार की पत्नी को शरद पवार की बेटी ने हराया

बारामती में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराकर लगातार चौथी जीत दर्ज की। इस बीच, राकांपा (एसपी) नेता विद्या चव्हाण ने एक मराठी समाचार चैनल को बताया कि वह लंके से बात करेंगी, ताकि यह समझा जा सके कि वह मार्ने के घर क्यों गये थे। उन्होंने कहा, 'गलत तो गलत है। चाहे लंके हो या कोई और, कोई भी इसका समर्थन नहीं कर रहा है।'

10 सीट पर लड़ा चुनाव, 8 पर हासिल की जीत

राकांपा-एसपी ने 2024 के आम चुनावों में विपक्षी गठबंधन के रूप में महाराष्ट्र से लोकसभा की 10 सीट पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से आठ पर उसकी जीत हुई। निर्वाचन आयोग ने इस वर्ष फरवरी में अजित पवार गुट को असली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी घोषित किया था और इस गुट को राकांपा का चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ आवंटित किया था। शरद पवार की पार्टी राकांपा (एसपी) को बाद में 'तुरही बजाते व्यक्ति' का चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।

चाचा की पार्टी में भतीजे अजित पावर ने डाली फूट

पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया था। पिछले साल जुलाई में अजित पवार और कुछ अन्य विधायकों के राज्य में शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने के बाद राकांपा में विभाजन हो गया था।

राजनीति में राज करने के लिए सबसे सटीक नीति का इस्तेमाल करने वाले को ही राजनीति का चाणक्य कहते हैं। चाचा-भतीजे की जंग में फिलहाल भतीजा अजित पवार सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हैं, हालांकि दोनों पवार में से कौन ज्यादा पावरफुल है इसके बारे में कहने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। जब विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे तो सारी तस्वीर सामने आ जाएगी कि कौन अधिक शक्तिशाली है। चुनावी नतीजे इस बात पर मुहर लगा देंगे कि शरद पवार का जलवा अभी बरकरार है या छोटे पवार उनसे आगे निकल चुके हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article