कैसे बना हाथ घुमाकर 'कुछ तो गड़बड़ है' कहने वाला डायलॉग, टीवी के ACP प्रद्युमन ने खुद बताई कहानी!

सीआईडी टीवी पर सबसे लंबे समय तक चलने वाले सीरियल में से एक है और इसका एक डायलॉग 'कुछ तो गड़बड़ है' भी खूब मशहूर है। एसीपी प्रद्युमन का रोल करने वाले शिवाजी साटम ने इसके पीछे की कहानी का खुलासा किया है।

ACP Pradyuman Shivaji Satam CID
एसीपी प्रद्युमन शिवाजी साटम सीआईडी सीरियल 

मुख्य बातें

  • टीवी पर सबसे लंबे समय तक चलने वाले शो में से एक है सीआईडी
  • शो में एसीपी प्रद्युमन का किरदार निभाते हैं शिवाजी साटम
  • अभिनेता ने किया टीवी पर अपने सबसे मशहूर डायलॉग की कहानी का खुलासा

मुंबई: अपराधों की गुत्थी सुलझाने पर आधारित सबसे लंबी चलने वाले हिट टीवी शो सीआईडी के एसीपी प्रद्युम्न बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए एक जाना माना नाम हैं और उनके जितना ही मशहूर है उनका वो मशहूर डायलॉग- 'कुछ तो गड़बड़ है दया।' अब नई दिलचस्प बात ये सामने आई है कि हाल ही में इसके पीछे की वास्तविक कहानी का पता चल चुका है। हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए, एसीपी प्रद्युम्न का रोल करने वाले ​​शिवाजी साटम ने खुलासा किया कि यह डायलॉग सोचकर योजना के तहत नहीं बनाया गया था।

वास्तव में, जब वह निर्माता के साथ एक सीन पर चर्चा कर रहे थे, तो मेकर को शिवाजी के हाथ के हावभाव को इतना आकर्षक लगा कि उन्होंने शिवाजी को अपने ऑनस्क्रीन कैरेक्टर के साथ भी ऐसा करने के लिए कहा।

शिवाजी ने इस बारे में बात करते हुए कहा, 'एक दिन मैं उनसे बात कर रहा था,सीन के बारे में कुछ चर्चा कर रहा था और वह मुझे घूर रहे थे। मैंने पूछा- क्या हुआ? उन्होंने कहा- जिस तरह से तू समझा रहा है। अभी जो तू ऐसे हाथ करके बता रहा था। यही मुझे चाहिए, करेगा तू ये? इसको तू एसीपी के कैरेक्टर में ला सकता है क्या?'

तब अभिनेता ने शो के लिए अपने इस इशारे को दोहराना शुरू किया और बाकी सब इतिहास है। जहां सोशल मीडिया ने शो के संवादों और पात्रों की लोकप्रियता को बढ़ाया है, वहीं इसकी खामियां भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रहती  हैं। कई बार बेतुके सीन दिखने पर लोग ट्रोल करते हुए इसकी चर्चा करते हैं लेकिन कुछ भी हो सीआईडी सीरियल चर्चा में रहता है।

उसी के बारे में बात करते हुए, शिवाजी ने कहा, 'सीआईडी ​​कभी भी एक रियलिटी शो या डॉक्यूड्रामा नहीं था। यह शुद्ध कल्पना थी। आपको अपनी कहानी एक घंटे या 45 मिनट में पूरा करनी होती है। तो कहीं न कहीं आपको भी कुछ जंप लेना पड़ता है। असल में तो एक मामले को सुलझाने में महीनों लगेंगे। ऐसे कुछ केस हैं, जिनको पूरा करने के लिए आपको दो से ज्यादा एपिसोड की जरूरत होगी। आप किसी कहानी के हर पैराग्राफ को शूट नहीं कर सकते, तो वो चीजें हमेशा रहेंगी। हमेशा कुछ ऐसा होता है जो अतार्किक होगा लेकिन जीवन भी कभी-कभी अतार्किक होता है।'

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