Maa Movie Review: रोंगटे खड़े किए बिना आखिर में 'वन टाइम वॉच' बनकर रह गई काजोल की मां

Maa Movie Review: अजय देवगन के बैनर में बनी काजोल, रॉनित रॉय और इंद्रनील सेनगुप्ता स्टारर मां में अच्छा वीएफएक्स वर्क है और शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक है लेकिन फिर भी ये डराती नहीं है। धीमी रफ्तार से चलने वाली फिल्म मां वन टाइम वॉच है, जो शैतान हॉरर यूनिवर्स को खास मदद नहीं करती है।

Rahul SharmaAuthored by: Rahul SharmaUpdated Jun 27 2025, 13:09 IST

क्रिटिक्स रेटिंग
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2.5

Horror
Release Date

Jun 27, 2025

Duration

2 hr 13 mins

maa movie review: kajol, ronit roy movie has its high times but fails to give horror and thrill

अगर मैं आपसे पूछूं कि पका हुआ आम कैसा होता है... आप फट से जवाब देंगे कि मीठा। क्योंकि पका हुआ आम मीठा ही होता है और अगर उसमें मिठास नहीं है तो इसका मतलब है कि आम अच्छा नहीं है। अगर यही सवाल हॉरर मूवी के बारे में पूछा जाए कि वो कैसी होनी चाहिए तो ये जवाब लाजमी है कि जिसे देखकर डर लगे। अगर हॉरर फिल्म डरा नहीं रही है तो वो अच्छी हॉरर मूवी नहीं है। काजोल की नई हॉरर मूवी मां में ठीक-ठाक ट्विस्ट एंड टर्न्स हैं, अच्छा बैकग्राउंड म्यूजिक है, बेहतरीन वीएफएक्स हैं और उम्मीद पर खरी उतरने वाली परफॉर्मेंसेज भी हैं लेकिन इसके साथ परेशानी ये है कि 2 घंटे 13 मिनट की ये मूवी डराती नहीं है।

फिल्म मां पश्चिम बंगाल के चंद्रपुर नाम के गांव से शुरू होती है, जहां रक्तबीज नाम के राक्षस का अंश अम्सजा का साया है। इस राक्षस की वजह से गांव का एक परिवार पीढ़ियों से शापित है, जिस कारण इसे अपने यहां पैदा होने वाली बच्चियों को मारना पड़ता है। इस परिवार का एक लड़का शुभांकर (इंद्रनील सेनगुप्ता) इस सारी चीजों से दूर अम्बिका (काजोल) नाम की लड़की के साथ अपनी जिंदगी शुरू करता है। इनकी एक प्यारी सी बेटी है, जिसे ये चंद्रपुर से दूर ही रखते हैं लेकिन हालात कुछ बनते हैं कि शुभांकर की मौत के बाद अम्बिका को अपनी बेटी के साथ चंद्रपुर आना पड़ता है। यहां से शुरू होता है मायावी राक्षस अम्सजा (रॉनित रॉय) का वो खेल जिसे खेलने के लिए वो सालों से बैठा है। अम्बिका कैसे अम्सजा के बिछाए जाल में अपनी बेटी को फंसने से बचाएगी और कैसे मां काली के आशीर्वाद से अम्सजा का विनाश करेगी ये फिल्म मां की कहानी है...