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Rajasthan: कांग्रेस का राजस्थान में क्या होगा? इस बार के लोकसभा चुनाव में खुलेगा खाता या टूटेगी उम्मीद

Loksabha Chunav: वैसे तो सवाल ये उठ रहे हैं कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में कांग्रेस का क्या होगा? कांग्रेस के सामने इस बार अपनी सीट बढ़ाने की चुनौती है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार मिलने के बावजूद उसे राजस्थान में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

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कांग्रेस को राजस्थान से काफी उम्मीदें।

Photo : Times Now Digital

Rajasthan Election: लोकसभा चुनाव 2024 में इस बार के राजस्थान में कांग्रेस पार्टी का क्या होगा? पिछले दो चुनावों (2014 और 2019) में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल पाया है, ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस बार खाता खुलेगा या उम्मीद टूट जाएगी। राजस्थान की सियासत में कांग्रेस का ग्राफ वर्ष 2009 के बाद हुए चुनावों में लगातार गिरता गया, जो आलाकमान के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

राजस्थान में क्यों टेंशन में है कांग्रेस?

2009 के लोकसभा चुनाव में जिस कांग्रेस ने राजस्थान की 25 में से 20 सीटों पर जीत का डंका बजाया था, उसकी हालत पिछले 10 सालों में बद से बदतर हो गई है। 2009 के बाद दो बार लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस सूबे की सभी 25 सीटों में से एक पर भी जीत हासिल नहीं कर सकी। 2014 के चुनाव में वो भाजपा जिसे 2009 में महज 4 सीटों से संतोष करना पड़ा था, उसने 21 सीटों की बढ़त बनाती हुए सभी 25 की 25 सीटे अपने कब्जे में ले लिया था।

किस चुनाव में किसे मिली कितनी सीटें?

लोकसभा चुनावकांग्रेसभाजपाUPANDA
200920 सीटे4 सीटें20 सीटें4 सीटें
20140 सीट25 सीटें0 सीट25 सीटें
20190 सीट24 सीटें0 सीटें25 सीटें
इसके बाद 2019 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो भाजपा ने 24 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। नागौर की सीट पर भाजपा और हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के बीच समझौता हुआ। इस चुनाव में भी कांग्रेस को एक भी सीट नसीब नहीं हुई। भाजपा ने 24 सीटें हासिल की और नागौर से हनुमान बेनीवाल सांसद चुने गए।

कांग्रेस के सामने सीट बचाने और बढ़ाने की चुनौती

देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सामने लोकसभा चुनाव के पहले चरण में न सिर्फ अपनी संख्या में इजाफे, बल्कि पिछली बार जीती गईं सीटों को बरकरार रखने की भी चुनौती है। पार्टी के चुनाव अभियान से जुड़े नेताओं का कहना है कि पार्टी को इस बार राजस्थान एवं कुछ अन्य राज्यों में अपेक्षाकृत ‘बेहतर प्रदर्शन’ करने की उम्मीद है।

राजस्थान में 2014 के भारतीय आम चुनाव राज्य की 25 सीटों के लिए हुए थे। भाजपा ने राज्य की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की और कांग्रेस असफल रही। एक सीट. मतदान प्रक्रिया 17 और 24 अप्रैल 2014 को दो चरणों में आयोजित की गई थी।

पहले चरण में 102 सीटों पर हुआ मतदान

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में जिन 102 सीट पर मतदान संपन्न हुआ उनमें से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 77 और कांग्रेस 56 सीट पर चुनाव लड़ रही है। पहले चरण में जिन राज्यों की सभी लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ उनमें तमिलनाडु (39), उत्तराखंड (5), अरुणाचल प्रदेश (2), मेघालय (2), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (1), मिजोरम (1), नगालैंड (1), पुडुचेरी (1), सिक्किम (1) और लक्षद्वीप (1) शामिल हैं।

इसके अलावा राजस्थान में 12, उत्तर प्रदेश में 8, मध्य प्रदेश में 6, असम और महाराष्ट्र में 5-5, बिहार में 4, पश्चिम बंगाल में 3, मणिपुर में 2 और त्रिपुरा, जम्मू कश्मीर और छत्तीसगढ़ में एक-एक सीट पर मतदान हुआ। कांग्रेस को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इन 102 सीटों में से 15 पर सफलता मिली थी। राजस्थान की जिन 12 सीटों पर मतदान हुआ उनमें से एक भी सीट कांग्रेस नहीं जीत सकी थी।

पहले चरण के मतदान के बाद कांग्रेस के चुनाव अभियान से जुड़े एक नेता ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि पिछली बार की तुलना में हमारी सीटें बढ़ेगी। राजस्थान में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।’ तमिलनाडु में कांग्रेस पिछली बार नौ सीट पर लड़ी थी और उसे आठ सीट हासिल हुई थी। इस बार भी वह दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण प्रदेश में नौ सीट पर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में उसके सामने बड़ी चुनौती अपनी जीती हुई सीट बचाने की है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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