Amit Shah in Jalpaiguri: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जलपाईगुड़ी में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तर बंगाल के लिए जारी बाढ़ राहत निधि में से 100 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की गई है, जिसे वापस लिया जाएगा। उन्होंने आगे वादा किया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने पर चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों के वेतन में ढाई साल के अंदर 500 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही, उन्होंने जलपेश मंदिर में सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चुनाव के बाद सरकार बनने पर यहां श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने हेतु 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने यह भी घोषणा की कि राजबंशी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
गोरखा मुद्दे के समाधान को प्राथमिकता
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Election 2026) की तारीख अब नजदीक आ रही है। इसी के साथ, केंद्रीय गृहमंत्री ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सत्ता में आने के बाद, दार्जिलिंग में गोरखा मुद्दे को हल करने को प्राथमिकता देगी और पूर्व के हिंसक आंदोलनों के लिए समुदाय के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेगी। शाह खराब मौसम की वजह से दार्जिलिंग की पहाड़ियों में स्थित लेबोंग के ऊपरी इलाकों तक नहीं पहुंच पाए और उन्होंने सभा को एक वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा, "आज आपसे नहीं मिल पाने का मुझे गहरा खेद है। लेकिन मैं आपसे वादा करता हूं कि 21 अप्रैल को कुर्सियोंग के सुकना में होने वाली निर्धारित जनसभा में मैं आपसे प्रत्यक्ष तौरपर मिलूंगा, जहां मैं दार्जिलिंग के लोगों के लिए हमारी विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करूंगा।"
गोरखालैंड की मांग को लेकर हिंसक घटनाएं
उन्होंने कहा, "फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा कि बंगाल में सरकार बनने के बाद हमारी प्राथमिकता गोरखा मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान करना होगी। सत्ता में आने के बाद हम गोरखा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लंबित सभी पुलिस मामलों को वापस ले लेंगे।" शाह ने आगे कहा कि चुनाव से पहले राज्य भर में हुई सभाओं के बाद उन्हें पूरा विश्वास है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को हरा देगी। दार्जिलिंग पहाड़ियों में रहने वाले नेपाली भाषी भारतीयों की दशकों पुरानी गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर अतीत में कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। साल 2011 में दार्जिलिंग के ऊपरी इलाकों और तलहटी के कुछ हिस्सों के प्रशासन के लिए अर्ध-स्वायत्त गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के गठन के बावजूद, 2017 तक हिंसक आंदोलन होते रहे।
दार्जिलिंग में कब होगा मतदान?
इस क्षेत्र में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) जैसी स्थानीय गोरखा पार्टियों तथा भाजपा और तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जहां अलग गोरखालैंड की मांग हमेशा से राजनीतिक केंद्र में रही है। आगामी चुनाव में, तृणमूल कांग्रेस ने बिमल गुरुंग की जीजेएम से अलग हुए गुट, अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजेपीएम) के साथ रणनीतिक सीट-साझाकरण गठबंधन किया है। तृणमूल कांग्रेस ने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियोंग की सीट अपने सहयोगी दल के लिए छोड़ दी हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने एक बार फिर गुरुंग का समर्थन हासिल किया है, हालांकि इस बार भाजपा इस क्षेत्र से सीधे चुनाव लड़ रही है। दार्जिलिंग में वोटिंग 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के पहले फेज में होगी। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जिसके बाद 4 मई को मतगणना होगी।
(भाषा इनपुट के साथ)
