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IT मिनिस्टर राजीव चंद्रशेखर के पास कितनी दौलत? थरूर के खिलाफ लड़ रहे चुनाव

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 5, 2024, 02:40 PM IST

Rajeev Chandrasekhar Net Worth: राजीव चंद्रशेखर के नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे के अनुसार, उनकी चल संपत्ति का कुल मूल्य 13,69,18,637 रुपये है, जबकि उनकी पत्नी के पास 12,47,00,408 रुपये की संपत्ति है। चंद्रशेखर पर 19,41,92,894 रुपये की देनदारियां हैं, जिसको लेकर विवाद हैं जबकि उनकी पत्नी पर 1,63,43,972 रुपये की देनदारी है।

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तिरुवनंतपुरम से बीजेपी प्रत्याशी राजीव चंद्रशेखर

Photo : Twitter

Rajeev Chandrasekhar Net Worth: केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट उन हॉटसीटों में शुमार है, जहां दिग्गजों के बीच चुनावी फाइट होने जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की इस पारंपरिक सीट से इस बार भारतीय जनता पार्टी के नेता व केंद्रीय आईटी मंत्री राजीव चंद्रशेखर मैदान में हैं। इसके अलावा भाकपा के दिग्गज नेता पन्नियन रवींद्रन भी मैदान में हैं। ऐसे में इस बार यहां काफी रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।

भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने गुरुवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे के अनुसार, उनकी चल संपत्ति का कुल मूल्य 13,69,18,637 रुपये है, जबकि उनकी पत्नी के पास 12,47,00,408 रुपये की संपत्ति है। इनमें उनके पास मौजूद नकदी, बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और सहकारी समितियों में जमा का विवरण, साथ ही बांड, डिबेंचर, शेयर, कंपनियों/म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय इकाइयों में निवेश शामिल हैं।

3.2 करोड़ के आभूषण

राजीव चंद्रशेखर की चल संपत्ति में 1942 मॉडल की 'रेड इंडियन स्काउट' भी शामिल है, जो कर्नाटक में पंजीकृत है। इसे 1994 में 10 हजार रुपये में खरीदा गया था। इसके साथ ही उनके पास आभूषण, सर्राफा और 3.25 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी हैं। भाजपा नेता की अचल संपत्तियों में 5,26,42,640 रुपये की कीमत पर खरीदी गई स्व-अर्जित संपत्ति शामिल है, जिसका अनुमानित वर्तमान बाजार मूल्य 14,40,00,000 रुपये है।

खुद के साथ पत्नी भी कर्जदार

चंद्रशेखर पर 19,41,92,894 रुपये की देनदारियां हैं, जिसको लेकर विवाद हैं जबकि उनकी पत्नी पर 1,63,43,972 रुपये की देनदारी है। इनमें बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य से ऋण शामिल हैं। वर्ष 2022-23 के आयकर रिटर्न में चंद्रशेखर की कुल आय 5,59,200 रुपये दिखाई गई है, जो वर्ष 2021-22 में 680 रुपये थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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