Gujarat Assembly Elections 2022: गुजरात चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। सोमवार को भावनगर जिले के पालीताना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को निशाने पर लिया। राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' में नर्मदा बचाओ आंदोलन की एक्टिविस्ट मेधा पाटकर के शामिल होने पर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए पीएम ने कहा कि गुजरातियों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए पार्टी को 'बांटो और राज' करो की अपनी रणनीति छोड़नी पड़ेगी।
मेधा पाटकर के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधा
विशाल रैली को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि गुजरात के लोगों ने कांग्रेस को खारिज कर दिया है। यह पार्टी एक समुदाय के लोगों को दूसरे समुदाय के खिलाफ भड़काती रही है और इसके चलते लोगों को काफी कष्ट झेलना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के लोग उन लोगों का समर्थन कभी नहीं करेंगे जो 'भारत को तोड़ने की इच्छा रखते हैं।' गुजरात की अपनी अन्य रैलियों में भी पीएम 'भारत जोड़ो यात्रा' में पाटकर के शामिल होने पर राहुल गांधी पर निशाना साध चुके हैं।
राज्य में दो चरणों में होगी वोटिंग
राज्य में विधानसभा की 182 सीटों के लिए दो चरणों एक दिसंबर और पांच दिसंबर को मतदान होंगे जबकि चुनाव नतीजे आठ दिसंबर को आएंगे। उन्होंने कहा कि गुजरात के लोग उस व्यक्ति को कभी माफ नहीं करेंगे जो 40 साल तक सरदार सरोवर बांध परियोजना को रोके रखने वाली महिला के साथ पदयात्रा की हो।
कांग्रेस ने पहले गुजरातियों-मराठियों को लड़ाया-कांग्रेस
प्रधानमंत्री ने कहा, 'कांग्रेस की विचारधारा 'बांटो और राज करो' की है। गुजरात जब अलग राज्य नहीं था तो कांग्रेस ने गुजरातियों एवं मराठियों को आपस में लड़ाया। इसके बाद गुजरात में कांग्रेस ने अलग-अलग समुदायों को आपस में लड़ाया। कांग्रेस के इन पापों की वजह से राज्य के लोगों को काफी कष्ठ सहना पड़ा।' गुजरात के लोग कांग्रेस की इस रणनीति को समझ गए और फिर चुनावों में उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया।
बांटो एवं राज करो की नीति त्यागे कांग्रेस-PM
पीएम ने आगे कहा कि गुजरात की सत्ता में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आने के बाद हालात बदल गए। बीते 20 सालों से राज्य विकास के मार्ग पर चल रहा है। उन्होंने कहा, 'गुजरात के लोगों की एकता की वजह से कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। अब गुजरातियों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए कांग्रेस को अपनी जातिवाद, सम्प्रदायवाद, वोट बैंक की राजनीति, बांटो एवं राज करो की नीति का त्याग करना पड़ेगा।'
