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राहुल गांधी माओवादियों की भाषा बोल रहे है... जमशेदपुर में गरजे पीएम मोदी; पढ़ें 10 बड़ी बातें

Election News: पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के शहजादे द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा किसी भी उद्योगपति को पार्टी द्वारा शासित राज्यों में निवेश करने से पहले 50 बार सोचने पर मजबूर कर देगी... शहजादे माओवादियों की भाषा बोल रहे हैं और नए-नए तरीकों से पैसा वसूल रहे हैं।

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पीएम मोदी ने राहुल गांधी को सुनाई खरी-खोटी।

Photo : Twitter

PM Modi Slams Rahul Gandhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर रविवार को निशाना साधते हुए कहा कि 'शहजादे द्वारा माओवादियों की भाषा बोलने' के कारण कोई भी उद्योगपति कांग्रेस शासित राज्यों में निवेश करने से पहले 50 बार सोचेगा। मोदी ने यहां एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर वंशवादी राजनीति को संरक्षण देने और लोकसभा सीट को 'खानदानी जयदाद' मानने का भी आरोप लगाया।

'माओवादियों की भाषा बोल रहे हैं शहजादे'

प्रधानमंत्री ने गांधी पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए कहा, 'कांग्रेस के शहजादे द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा किसी भी उद्योगपति को पार्टी द्वारा शासित राज्यों में निवेश करने से पहले 50 बार सोचने पर मजबूर कर देगी...शहजादे माओवादियों की भाषा बोल रहे हैं और नए-नए तरीकों से पैसा वसूल रहे हैं।' इससे पहले, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी ने शनिवार को नयी दिल्ली में कहा था, 'मैं प्रधानमंत्री मोदी से कभी भी और कहीं भी बहस करने के लिए तैयार हूं, लेकिन मुझे यकीन है कि वह नहीं आएंगे। पहला सवाल मैं प्रधानमंत्री मोदी से पूछूंगा कि अडाणी के साथ उनका क्या रिश्ता है...' गांधी ने कहा था, 'प्रधानमंत्री कांग्रेस को अडाणी-अंबानी से ढेर सारा पैसा मिलने की बात करते हैं, लेकिन उनमें इसकी जांच कराने की हिम्मत नहीं है।'

कांग्रेस और जेएमएम कर रहे 'धन उगाही'

जमशेदपुर की रैली में मोदी ने भाजपा के विद्युत बरन महतो के लिए प्रचार किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने नक्सलियों की रीढ़ तोड़ दी है, लेकिन कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने 'धन उगाही' की जिम्मेदारी ली है।

इन मुख्यमंत्रियों पीएम मोदी ने दी चुनौती

मोदी ने कहा, 'मैं कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस बात का जवाब देने की चुनौती देता हूं कि क्या वे अपने शहजादे की उद्योग-विरोधी भाषा से सहमत हैं।'

राहुल गाधी को लेकर किया ये बड़ा दावा

उन्होंने रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के फैसले को लेकर गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस के ‘शहजादे’ यह कहते हुए इस निर्वाचन क्षेत्र में पहुंचे हैं कि 'यह मेरी मां की सीट है, जो स्कूल जाने वाला आठ साल का लड़का भी नहीं कहेगा।'

कोविड महामारी को लेकर क्या बोले पीएम?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'उनकी मां (सोनिया गांधी) ने कहा कि वह अपने बेटे को रायबरेली को सौंप रही हैं...उन्हें पार्टी का एक भी समर्पित कार्यकर्ता नहीं मिला... रायबरेली के मतदाता उनसे पूछते हैं कि वे कहां थे जब लोग कोविड महामारी के दौरान मुसीबत में थे।'

'सीट को खानदानी जयदाद मानते हैं कांग्रेसी'

उन्होंने आरोप लगाया, 'कांग्रेस एक वसीयतनामा लिख रही है; वे इस संसदीय सीट को खानदानी जयदाद मानते हैं।' विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो को देश के विकास से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि वे भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूबे हुए हैं।

'भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं पूर्व सीएम'

प्रधानमंत्री ने कहा, 'कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननी है, यह कोयला और 2जी घोटालों सहित कई घोटालों में शामिल रही है...झामुमो और कांग्रेस को उद्योगों की कोई चिंता नहीं है... झारखंड अपने समृद्ध संसाधनों के बावजूद भ्रष्ट नेताओं के पास मौजूद काले धन के ढेर के लिए जाना जाता है। उन्होंने सेना को भी नहीं बख्शा और उसकी जमीन हड़प ली...झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री (हेमंत सोरेन) भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं।'

जमशेदपुर के लोगों को पीएम ने दिया आश्वासन

प्रधानमंत्री ने लोगों को यह भी आश्वासन दिया कि वह राज्य में 'लूटा हुआ सार्वजनिक धन' भ्रष्ट नेताओं से वसूल करेंगे और इसे उन गरीबों को लौटा देंगे जिनका यह धन है। मोदी ने कांग्रेस पर लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित करने का भी आरोप लगाया और कहा कि पूर्व में उस पार्टी के शासनकाल के दौरान 18,000 गांवों की स्थिति 18वीं सदी जैसी थी।

जल, बिजली, रेल को लेकर किया बड़ा दावा

उन्होंने कहा, 'मोदी ने 52 करोड़ लोगों को जनधन खाते, चार करोड़ लोगों को पक्के घर, 18,000 गांवों को बिजली के साथ नल का साफ पानी, आधुनिक रेलवे और बुनियादी ढांचा दुरुस्त करने का काम किया।'

प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड सरकार पूर्वी सिंहभूम में प्रस्तावित धालभूमगढ़ हवाई अड्डे के रास्ते में बाधाएं पैदा कर रही है।

(इनपुट- एजेंसी)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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