Artificial Intelligence यानी AI ने दुनिया बदलने की रफ्तार तेज कर दी है। कंपनियां Data Centres बनाने, GPUs खरीदने और AI Models विकसित करने पर खरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। Nvidia, Microsoft, Amazon, Alphabet, Meta जैसी कंपनियां इस दौड़ में सबसे आगे हैं।
लेकिन अब एक सवाल तेजी से बड़ा हो रहा है कि क्या AI का मार्केट वैल्यूएशन इसके असली असर से बड़ा हो गया है? यही सवाल अब AI पर दांव लगाने वाले निवेशकों को परेशान कर रहा है। यही वजह है कि 2000 के Dot-Com Bubble की याद फिर ताजा हो रही है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि AI का अगला पड़ाव निश्चित रूप से क्रैश ही होगा। फर्क यह है कि AI टेक्नोलॉजी वास्तविक है, लेकिन इसे लेकर निवेशक जिस कीमत पर दांव लगा रहे हैं, वह ऐतिहासिक मानकों पर काफी महंगी दिखाई दे रही है।
खरबों डॉलर का सवाल, कमाई कितनी?
AI पर लगाए गए ट्रिलियन्स डॉलर को अब सिर्फ एक सवाल के जवाब का इंतजार है कि निवेश की तुलना में कमाई कितनी है। क्योंकि, 2026 में AI इन्फ्रा पर करीब $1.5 ट्रिलियन यानी लगभग ₹142.5 लाख करोड़ तक खर्च का अनुमान है। समस्या यह नहीं कि इतना पैसा खर्च किया जा रहा है। असली सवाल है कि इस निवेश से कितना रेवेन्यू और प्रॉफिट मिलने वाला है।
मिसाल के तौर पर जुलाई 2026 के अंत तक Anthropic की एनुअलाइज्ड रेवेन्यू रन रेट (ARRR) करीब $65 अरब बताई गई। OpenAI की यह रकम करीब $40 अरब थी। यानी दोनों को मिलाकर करीब $105 अरब की ARRR पर हैं। इसके मुकाबले इंडस्ट्री में डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग पावर और इन्फ्रा पर कई गुना ज्यादा खर्च हो चुका है। ऐसे में अब निवेशक पूछ रहे हैं कि क्या AI की भविष्य में कमाई इतनी तेजी से बढ़ पाएगी कि यह आज के महंगे वैल्यूएशन को सही साबित कर पाए।
S&P 500 भी बन गया AI का दांव
AI अब बाजार के एक छोटे हिस्से की कहानी नहीं है। S&P 500 की टॉप 10 कंपनियों में Nvidia, Microsoft, Amazon, Alphabet, Meta और Broadcom जैसी AI से जुड़ी कंपनियों का वजन सबसे ज्यादा है। ये 10 कंपनियों की कुल मार्केट कैप में करीब 41% की हिस्सेदार हैं। यह आंकड़ा इसलिए अहम है, क्योंकि 2000 के डॉट कॉम बबल के पीक पर Top 10 कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 26-27% थी। यानी AI स्टॉक्स आज डॉट कॉम स्टॉक्स की तुलना में कहीं ज्यादा फूले हुए हैं। इसका सीधा मतलब यह भी है कि अगर AI से जुड़ी बड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन में तेज करेक्शन आता है, तो उसका असर पूरे यूएस मार्केट और इंडेक्स फंड्स तक होगा।
Sales के मुकाबले भी बाजार महंगा
वैल्यूएशन की दूसरी बड़ी चिंता प्राइस टू सेल्स (Price-to-Sales) रेश्यो को लेकर देखने को मिल रही है। 2000 के डॉटा कॉम बबल के पीक पर S&P 500 का प्राइस टू सेल्स रेश्यो करीब 2.3 गुना था। आज यह करीब 3.3 गुना है। इसका मतलब है निवेशक इन कंपनियों की सेल्स के मुकाबले शेयरों की ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं। हालांकि, यह अपने आप में क्रैश या करेक्शन का संकेत नहीं। लेकिन, इससे पता चलता है कि बाजार इन कंपनियों की फ्यूचर ग्रोथ को पहले ही प्राइस इन कर चुका है और आगे चलकर अगर ये कंपनियां अपेक्षा के मुताबिक नतीजे नहीं दे पाती हैं, तो बड़े सेल ऑफ का जोमिख बढ़ता जाएगा।
बफे इंडिकेटर ने बजाई खतरे की घंटी
चर्चित वैल्यूएशन मेथड बफे इंडिकेट (Buffett Indicator) में टोटल स्टॉक मार्केट वैल्यू को GDP से कंपेयर किया जाता है। यह इंडिकेटे फिलहाल करीब 230-237% के स्तर पर बताया जा रहा है। डॉट कॉम बबल के पीक पर यह करीब 150% था। इसका मतलब यह नहीं कि बाजार तुरंत क्रैश होने वाला है। हिस्टोरिकल डेटा के हिसाब से यह बताता है फिलहाल बाजार के वैल्यूएशन बहुत खिंचे हुए हैं। यानी ग्रोथ की उम्मीद थोड़ी भी कम हुई, निवेशक इस झटके को सह नहीं पाएंगे।
