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Maharashtra: सूची से हटाए जा रहे मतदाताओं के नाम, विपक्ष ने चुनाव आयोग पर ही लगा दिया आरोप

Maharashtra Elections: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इस बीच वार-पलटवार का सिलसिला भी जारी है। विपक्षी नेता ने तो निर्वाचन आयोग पर ही गंभीर आरोप लगा दिया है। ये दावा किया जा रहा है कि एमवीए की ओर झुकाव रखने वाले मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच तेज आरोप-प्रत्यारोप का आरोप।

Assembly Elections 2024: महा विकास आघाडी (एमवीए) के नेताओं ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची से विपक्षी दलों की ओर झुकाव रखने वाले मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि निर्वाचन आयोग के कामकाज में कोई पारदर्शिता नहीं है और इसके अधिकारी सत्तारूढ़ दलों के दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमवीए निर्वाचन आयोग के समक्ष यह मुद्दा उठाएगा।

कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर लगा दिया गंभीर आरोप

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा और मतगणना 23 नवंबर को होगी। एमवीए नेताओं विशेष रूप से कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले ने स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव के लिए राज्य की पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला को हटाने की मांग की। पटोले ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के फॉर्म-7 के तहत विभिन्न कारणों से मतदाता सूची से नाम हटाए जाते हैं। लेकिन इसके तहत विपक्षी दलों की ओर झुकाव रखने वाले मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इशारे पर यह सब हो रहा है।

पटोले ने कहा, “कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राकांपा (एसपी) की तरफ झुकाव रखने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि भाजपा चुनाव हार रही है।”

नेता प्रतिपक्ष ने भी मतदाता सूची पर किया बड़ा दावा

शिवसेना (यूबीटी) के नेता और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने दावा किया कि नासिक सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र में 6,000 मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं और कलेक्टर के समक्ष मुद्दा उठाने के बावजूद इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दलों की जीती हुई औरंगाबाद सेंट्रल और सिल्लोड सीट पर लगभग 27,000 मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ा गया है।

राकांपा (एसपी) के नेता जितेंद्र अव्हाड ने मांग की कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची को लेकर श्वेत पत्र प्रकाशित करे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का प्रिंट इतना खराब है कि इसे पढ़ा नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि नाम, पते और फोटो भी गलत हैं। अव्हाड ने कहा, “जिस तरह से चुनाव कराया जा रहा है वह संदिग्ध है। यह शर्मनाक है।”

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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