Karnataka Assembly Election 2023 : कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए सियासी पारा चढ़ चुका है। वोट बैंक के समीकरण को अपने पक्ष में करने के लिए राजनीतिक दल अपने फॉर्मूले पर आगे बढ़ कहे हैं। दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी तैयारी है। कर्नाटक के चारों क्षेत्रों बेंगलुरु,ओल्ड मैसूर, बेलगावी और कलबुर्गी में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ मची है। हालांकि, इन चारों क्षेत्रों में किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि अलग-अलग दलों का दबदबा है। आज हम यहां बात करेंगे ओल्ड मैसूर की। 2018 के विधानसभा चुनाव में ओल्ड मैसूर की 48 सीटों में से JD-S को 25, कांग्रेस को 16 और भाजपा को 5 सीटें मिली थीं।
ओल्ड मैसूर क्षेत्र की सीटें
| क्रम संख्या | क्षेत्र | सीट |
| 1 | मंड्या | 7 |
| 2 | हासन | 7 |
| 3 | मैसूर | 11 |
| 4 | चामराजनगर | 4 |
| 5 | रामनगर | 4 |
| 6 | चिक्काबल्लापुर | 5 |
| 7 | कोलार | 6 |
| 8 | बेंगलुरु ग्रामीण | 4 |
ओल्ड मैसर क्षेत्र में वोक्कालिगा का दबदबा
ओल्ड मैसर क्षेत्र में कर्नाटक के दूसरे सबसे बड़े समुदाय वोक्कालिगा का दबदबा है। परंपरागत रूप से इस समुदाय को जे-डीएस का वोट बैंक माना जाता है। इसके बाद इलाके में कांग्रेस का प्रभाव है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस इलाके में कमजोर रही है लेकिन इस बार वह जेडी-एस एवं कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी करने की कोशिश कर रही है। ओल्ड मैसर क्षेत्र में विधानसभा की 48 सीटें आती हैं। मंड्या में 7, हासन में 7 सीट, मैसूर में 11 सीट, चामराजनगर में 4 सीट, रामनगर में 4 सीट, चिक्काबल्लापुर 5 सीट, कोलार में 6 सीट और बेंगलुरु ग्रामीण में 4 सीटें आती हैं। इस इलाके के आठ जिलों में भाजपा के सीटों का आंकड़ा कभी दहाई में नहीं पहुंचा है।
भाजपा के पास यहां कोई बड़ा चेहरा नहीं
भाजपा के लिए इस क्षेत्र में जेडी-एस और कांग्रेस की तरह वोक्कालिगा समुदाय से कोई बड़ा स्थानीय चेहरा नहीं है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और जेडी-एस नेता एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। वोक्कालिगा समुदाय पर इन दोनों नेताओं का असर है जो चुनाव में इन्हें फायदा पहुंचाता है। भाजपा इन दोनों नेताओं की काट निकालने की तैयारी में है। इस क्षेत्र से बासवराज सरकार के मंत्रिमंडल में दो नेताओं के नारायणगौड़ा और के सुधाकर को जगह मिली।
क्या पिछला प्रदर्शन दोहरा पाएंगे कुमारास्वामी?
मंड्या से निर्दलीय सांसद समंथा अंबरीश ने भाजपा का समर्थन करने का ऐलान किया है। लेकिन लोगों का कहना है कि अंबरीश का समर्थन भगवा पार्टी को ज्यादा फायदा नहीं पहुंचा पाएगा क्योंकि उनका प्रभाव सीमित क्षेत्र में है। दूसरा लोकसभा का चुनाव उन्होंने कांग्रेस और किसान समूहों के समर्थन से जीता था। फिर भी इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती कुमारास्वामी के लिए है। उन पर 2018 का प्रदर्शन दोहराने का दबाव। पिछले विधानसभा चुनाव में जेडी-एस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए इलाके की 48 में से 25 सीटों पर जीत दर्ज किया था। मंड्या की सभी छह एवं हासन की सात सीटों पर जेडी-एस का कब्जा हुआ था। पिछले विस चुनाव में यहां कांग्रेस को 16 और भाजपा को 5 सीटें मिली थीं।
