इलेक्शन

जसवंत के बेटे मानवेंद्र सिंह की 6 साल बाद होगी BJP में वापसी, आज थामेंगे कमल, ऐसा रहा सियासी सफर

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 12, 2024, 03:14 PM IST

2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जसवंत सिंह को टिकट देने से इनकार कर दिया। इस पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और हार गए। इसके बाद मानवेंद्र सिंह ने विद्रोह कर दिया। इसके कारण उन्हें भाजपा से निलंबित कर दिया गया था।

Image

मानवेंद्र सिंह

Photo : PTI

Manvendra Singh: पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता जसवंत सिंह के बेटे कर्नल (सेवानिवृत्त) मानवेंद्र सिंह छह साल के अंतराल के बाद आज फिर से पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को बाड़मेर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में मानवेंद्र सिंह दोबारा भाजपा में शामिल होंगे। मानवेंद्र सिंह ने अपना पहला चुनाव 1999 में भाजपा के टिकट पर लड़ा था, लेकिन वह कांग्रेस नेता कर्नल (सेवानिवृत्त) सोनाराम चौधरी से हार गए। 2004 में पासा पलटा और मानवेंद्र सिंह ने भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता।

ये भी पढ़ें- इस चुनाव यूपी-बिहार में नहीं गली छोटे दलों की दाल, सौदेबाजी में नाकामी, अरमानों पर फिरा पानी

https://www.timesnowhindi.com/elections/smaller-parties-of-up-bihar-feel-left-out-this-lok-sabha-election-2024-season-article-109241430

2014 में पार्टी से निलंबित

2013 में उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता और शेओ निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जसवंत सिंह को टिकट देने से इनकार कर दिया। इस पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और हार गए। इसके बाद मानवेंद्र सिंह ने विद्रोह कर दिया। इसके कारण उन्हें भाजपा से निलंबित कर दिया गया। बाद में वह 2018 में कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने 2018 में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

2019 में कांग्रेस के टिकट पर हारे

2019 में वह एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और हार गए। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें सिवाना से मैदान में उतारा। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी सहयोगी, कांग्रेस नेता सुनील परिहार ने पार्टी के खिलाफ विद्रोह कर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसका नतीजा यह हुआ कि मानवेंद्र सिंह तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा। सुनील परिहार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद मानवेंद्र सिंह निराश हो गए और उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।

बाड़मेर में त्रिकोणीय मुकाबला

इस बार बाड़मेर में त्रिकोणीय मुकाबले में अपनी जीत को लेकर भाजपा आश्वस्त है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नारायण पंचारिया ने कहा कि हम इस सीट को जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है। 2014 में भी बाड़मेर में त्रिकोणीय मुकाबला था, फिर भी हम जीते। इस बार भी कुछ अलग नहीं है और हम यह सीट जीतेंगे। बता दें कि इस सीट से निर्दलीय रवींद्र भाटी भी चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें खूब समर्थन मिल रहा है। (आईएएनएस इनपुट)

टाइम्स नाउ नवभारत
टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलauthor

अक्टूबर 2017 में डिजिटल न्यूज़ की दुनिया में कदम रखने वाला टाइम्स नाउ नवभारत अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। अपने न्यूज चैनल टाइम्स नाउ नवभारत की सोच एवं नजरिए के साथ आगे बढ़ते हुए यह न्यूज़ प्लेटफॉर्म आम लोगों से जुड़े मुद्दों का गहराई से विश्लेषण एवं उसे आसान भाषा में पेश करता आया है। राजनीति से लेकर खेल, मनोरंजन, कारोबार और आम लोगों के जीवन पर असर डालने वालीं खबरों का मायने समझाते हुए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों के भरोसे पर खरा उतरा है। \n\nसाथ ही यह अपने न्यूज़ चैनल पर दिखाए जाने वाली खबरों, शोज, स्पशेल कार्यक्रमों एवं रिपोर्टों को पेश करता है। चैनल के ये कार्यक्रम एवं शोज देश-दुनिया के घटनाक्रमों पर एक नया एवं विश्वसनीय नजरिया देते हैं। अपनी खबरों एवं विश्लेषण के चलते पसंदीदा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बन चुका टाइम्स नाउ नवभारत, डिजिटल लोगों के भरोसे को लगातार मजबूत कर रहा है।

और पढ़ें
End of Article