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राहुल गांधी के लिए क्या चाहती हैं चाची मेनका गांधी? भतीजे और बेटे से जुड़े सवाल पर कह दी ये बड़ी बात

Lok Sabha Chunav:सोनिया गांधी की देवरानी और राहुल-प्रियंका की चाची मेनका गांधी ने अपने भतीजे राहुल गांधी और बेटे वरुण गांधी के बारे में पूछे जाने पर कहा है कि हर किसी की अपनी राह और किस्मत होती है। उन्होंने इस मौके पर अपने बेटे वरुण की खुशी की कामना की। उन्होंने क्या कुछ कहा, इस रिपोर्ट में पढ़िए।

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बेटे और भतीजे से जुड़े सवाल पर क्या बोलीं मेनका गांधी?

Photo : Times Now Digital

Maneka Gandhi on Rahul Gandhi: गांधी परिवार की छोटी बहु, राहुल गांधी-प्रियंका गांधी वाड्रा की चाची, सोनिया गांधी की देवरानी और सुलतानपुर सीट से सांसद और भाजपा उम्मीदवार मेनका गांधी ने अपने बेटे और भतीजे से जुड़े सवाल पर कहा कि मैं उसे खुश देखना चाहती हूं। उन्होंने ये दावा किया कि वो इस बार बड़े अंतर से चुनाव जीतने जा रही हैं। साथ ही उन्होंने अपने बेटे वरुण गांधी के टिकट कटने पर भी टिप्पणी की।

सिर्फ सांसद नहीं चलाते हैं हमारी पार्टी- मेनका

बीजेपी सांसद और उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर सीट से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार मेनका गांधी ने अपने बेटे वरुण गांधी और राहुल गांधी से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा कि "...मौका क्षमता पर निर्भर करता है, जिसके पास क्षमता है वह अपना रास्ता बना लेगा। यह गलत धारणा है कि पार्टियां सांसद चलाते हैं, हमारी पार्टी में करोड़ों लोग हैं जो इसे चलाते हैं और सांसद सिर्फ 300-400 हैं, क्या हमें नहीं लगता कि बाकी लोग नेता हैं?"

बेटे और भतीजे के सवाल पर क्या बोली मेनका?

राहुल गांधी और वरुण गांधी के बारे में पूछे जाने पर वह कहती हैं, 'हर किसी की अपनी राह और किस्मत होती है, मैं कभी किसी की क्षमता के बारे में नहीं बोलती। सबके अपने-अपने रास्ते हैं, सबके अपने-अपने तरीके हैं।' जब ये सवाल किया गया कि वरुण गांधी की बीजेपी से नाराजगी है, उसका असर आपकी सभाओं में दिखेगा? तो मेनका ने कहा कि क्यों... बिल्कुल नहीं। उन्होंने भाजपा से नाराजगी की बात को खारिज कर दिया।

इस बार भारी मतों से जीतने का किया है दावा

गांधी परिवार के गढ़ कहे जाने वाले अमेठी और रायबरेली के पड़ोसी क्षेत्र सुलतानपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने हाल ही में कहा था कि उनका ध्यान स्थानीय मुद्दों पर है और उन्होंने दावा किया कि इस बार वह भारी मतों से जीतेंगी। हालांकि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भाजपा द्वारा उनके बेटे वरुण गांधी को पीलीभीत से टिकट नहीं दिए जाने पर टिप्पणी करने से उस वक्त भी इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि था वरुण जल्द ही सुलतानपुर में उनके लिए प्रचार करेंगे।

रायबरेली पर टिप्पणी नहीं करना चाहतीं मेनका

आठ बार की सांसद ने कहा कि वह केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं के बारे में चिंतित हैं और रायबरेली से कांग्रेस का सफाया करने के भाजपा के आह्वान पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं। रायबरेली से गांधी परिवार का सफाया करने के भाजपा के वादे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है...मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र और यहां के लोगों की समस्याओं को लेकर चिंतित हूं।'

अमेठी और रायबरेली इस जिले के नजदीक हैं। राहुल गांधी इस बार जहां रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं गांधी परिवार के करीबी केएल शर्मा को अमेठी में स्मृति ईरानी के खिलाफ चुनाव मैदान में खड़ा किया गया है। दोनों सीट पर वोटिंग हो चुकी है।

किसके साथ है इस बार मेनका का मुकाबला?

मेनका गांधी ने 2019 में सुलतानपुर से 14,000 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने कहा 'इस बार मेरी जीत का अंतर ज्यादा होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने से खुश हैं लेकिन 'यहां के चुनावों में यह कोई मुद्दा नहीं है।' भाजपा नेता का मुकाबला सपा के राम भुआल निषाद से है, जबकि बसपा ने अन्य पिछड़ा वर्ग के नेता उदराज वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। यह पूछे जाने पर कि अगर भाजपा दोबारा सरकार बनाती है तो क्या वह मंत्री पद की उम्मीद कर रही हैं, उन्होंने कहा, 'यह मेरे हाथ में नहीं है। यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है।' सुलतानपुर में छठे चरण में 25 मई को मतदान होगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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