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महाराष्ट्र चुनाव में किसका खेल बिगाड़ेंगे मनोज जरांगे? मराठा समुदाय बहुल सीटों के लिए बनाया बड़ा प्लान

Maharashtra Chunav: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सबसे रोचक मोड़ मनोज जरांगे की एंट्री से हो गई है। मराठा समुदाय बहुल सीटों पर जरांगे उम्मीदवार उतारेंगे। अब सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर वो भाजपा को अधिक नुकसान पहुंचाएंगे, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को या फिर विपक्षी दलों के गठबंधन MVA की सिरदर्द बढ़ाएंगे।

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मनोज जरांगे पाटील

Assembly Elections 2024: आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने रविवार को घोषणा की कि वह महाराष्ट्र की उन विधानसभा सीट पर मराठा उम्मीदवार उतारेंगे, जहां इस समुदाय के लोगों की अच्छी-खासी आबादी है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में सभा को संबोधित करते हुए जरांगे ने कहा कि वह केवल उन्हीं सीटों पर मराठा उम्मीदवार उतारेंगे, जहां समुदाय की जीत की संभावना है।

किन सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे मनोज जरांगे

जरांगे ने कहा कि उनका समूह अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित क्षेत्रों में मराठा मुद्दों का समर्थन करने वाले अन्य उम्मीदवारों का समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मराठा समुदाय की जीत की संभावना नहीं है, वहां उनका समूह पार्टी, जाति या धर्म की परवाह किए बिना उम्मीदवारों का समर्थन करेगा, बशर्ते वे आरक्षण की मांग का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हों।

संभावित उम्मीदवारों से नामांकन दाखिल करने को कहा

मनोज जरांगे ने कहा कि जो उम्मीदवार उपरोक्त मांग से सहमत हैं, उन्हें लिखित प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर करना होगा। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा और मतगणना 23 नवंबर को होगी। जरांगे ने संभावित उम्मीदवारों से नामांकन पत्र दाखिल करने का आग्रह करते हुए कहा कि उनकी उम्मीदवारी के बारे में अंतिम निर्णय 29 अक्टूबर को किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार से नामांकन वापस लेने का अनुरोध किया जाता है तो उसे इसका अनुपालन करके नामांकन पत्र वापस लेना होगा।

मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने का आरोप

जरांगे ने उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस पर मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने मराठा समुदाय से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग के पीछे एकजुट होने और अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखने की अपील की। जरांगे ओबीसी श्रेणी के तहत मराठों के लिए आरक्षण और हैदराबाद, बॉम्बे और सतारा के राजपत्रों की मसौदा अधिसूचनाओं को लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें मराठा समुदाय को कृषक समूह कुनबी घोषित करते हुए ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण और लाभ के लिए पात्र बताया गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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