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चंडीगढ़ लोकसभा चुनाव: कांग्रेस ने मनीष तिवारी को उतारकर खेला बड़ा दांव, क्या इस बार टूटेगा BJP का तिलिस्म? जानिए क्या हैं समीकरण

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 13, 2024, 11:20 PM IST

Chandigarh Lok Sabha Election: चंडीगढ़ में कांग्रेस का यह दांव बीजेपी के लिए काफी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। दरअसल, आप और कांग्रेस के गठबंधन ने पहले ही मेयर चुनाव में बीजेपी को पटखनी दी थी। अब कांग्रेस ने दिग्गज नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी को मैदान में उतारकर बड़ा दांव खेल दिया है।

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मनीष तिवारी

Photo : Twitter

Chandigarh Lok Sabha Election: चंडीगढ़ जैसी वीआईपी लोकसभा सीट पर मुकाबला काफी रोचक हो चुका है। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने शनिवार को एक और लिस्ट जारी की। इसमें पार्टी ने दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी को चंडीगढ़ से टिकट दिया है। मनीष तिवारी के मैदान में उतरने से बीजेपी की कब्जे वाली इस सीट पर नए समीकरण तैयार होने लगे हैं।

दरअसल, इस बार बीजेपी ने भी चंडीगढ़ से अपना प्रत्याशी बदला दिया है और किरण खेर की जगह संजय टंडन को मैदान में उतारा है। संजय टंडन काफी लंबे समय तक चंडीगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में यहां कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है। बता दें, 2019 के लोकसभा चुनाव में किरण खेर ने कांग्रेस प्रत्याशी पवन बंसल को हराया था। किरण खेर को इस चुनाव मे 231,188 वोट मिले, जबकि पवन बंसल को 1,84,218 वोट मिले थे।

बीजेपी के लिए खड़ी हो सकती है मुश्किल

चंडीगढ़ में कांग्रेस का यह दांव बीजेपी के लिए काफी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। दरअसल, आप और कांग्रेस के गठबंधन ने पहले ही मेयर चुनाव में बीजेपी को पटखनी दी थी। यह नगर निकाय भी लंबे समय से बीजेपी के कब्जे में था। वहीं, अब मनीष तिवारी की दावेदारी के साथ आप व कांग्रेस का गठजोड़ बीजेपी के संजय टंडन के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

चंडीगढ़ लोकसभा सांसदों की लिस्ट

वर्षलोकसभा सांसद पार्टी
1967श्रीचंद गोयल भारतीय जनसंघ
1971अमरनाथ विद्यालंकारभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977कृष्णकांत जनता पार्टी
1980जगन्नाथ कौशल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई)
1984जगन्नाथ कौशल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1989हरमोहन धवन जनता दल
1991पवन कुमार बंसलभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1996सत्यपाल जैन भारतीय जनता पार्टी
1998सत्यपाल जैन भारतीय जनता पार्टी
1999पवन कुमार बंसल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2004 पवन कुमार बंसल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2009 पवन कुमार बंसल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2014 किरण खेर भारतीय जनता पार्टी
2019 किरण खेर भारतीय जनता पार्टी

लुधियाना से सांसद रह चुके हैं मनीष तिवारी

बता दें, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी 2009 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना से लोकसभा सांसद रहे हैं। 2014 में खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था, इसके बाद 17वीं लोकसभा में वह पंजाब के आनंदपुर साहिब से कांग्रेस के सांसद चुने गए थे। 2012 से 2014 तक वे कांग्रेस की यूपीए सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री भी रहे हैं। मनीष तिवारी चंडीगढ़ के ही रहने वाले हैं। मनीष तिवारी की मां अमृता तिवारी नगर निगम की मनोनीत पार्षद भी रह चुकी हैं।

कौन हैं संजय टंडन

संजय टंडन 2010 से 2019 तक चंडीगढ़ भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं। उनकी अगुआई में ही बीजेपी ने लगातार दो लोकसभा चुनाव के साथ-साथ चंडीगढ़ निकाय चुनावों में भी जीत हासिल की थी। इसके बाद टंडन को हिमाचल प्रदेश बीजेपी का सह प्रभारी बनाया गया था। हालांकि, अब किरण खेर का टिकट काटकर संजय टंडन को फिर से चंडीगढ़ लाया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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